सरकार ने UP के किसानों को करोड़ों रुपए दिए- बोलीं एंकर तो भड़क गए राकेश टिकैत

राकेश टिकैत ने कहा है कि मोदी सरकार गन्ना किसानों का पूरा भुगतान नहीं करती और उसकी तरफ से भुगतान को लेकर झूठा प्रचार किया जाता है।

rakesh tikait, narendra modi, chitra tripathi राकेश टिकैत किसानों के मुद्दे को लेकर बीजेपी पर हमलावर रहे हैं (Photo-Indian Express)

भारतीय किसान यूनियन के नेता और किसान नेता राकेश टिकैत उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर अभी से रणनीति बनाने में जुट गए हैं। कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलनरत किसानों की तरफ से सरकार पर दबाव बनाने के लिए राकेश टिकैत लगातार बीजेपी के खिलाफ मोर्चा क=खोलते आए हैं। इस चुनाव में भी वो बीजेपी के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करते नजर आएंगे।

इसी बीच उन्होंने आज तक के शो, ‘दंगल’ में हिस्सा लिया जहां एंकर चित्रा त्रिपाठी के सवालों से वो नाराज़ होते दिखे। चित्रा त्रिपाठी ने उनसे सवाल किया, ‘प्रधानमंत्री ने लिखा है कि कोरोना के समय देश के छोटे किसानों के खाते में सरकार ने एक लाख करोड़ से अधिक पैसे ट्रांसफर किए हैं। और सिर्फ उत्तर प्रदेश.. वहां 24 हजार करोड़ से ज्यादा पैसे किसानों को दिए गए हैं। तो क्या आपको ये नज़र नहीं आता?’

जवाब में राकेश टिकैत ने कहा, ‘हमने कहा कि हमें भाव दे दो बस। आप हमारा ही पैसा हमें नहीं दे रहे। गन्ने का भुगतान आपने किया नहीं। फसलों के रेट आप आधे दे रहे हो और कह रहे हो कि खाते में दे दिए। आप हमारा भाव दे दो ना, हिसाब किताब करवा दो हमारा।’

शो की एंकर ने आगे सवाल किया, ‘प्रधानमंत्री ने अलीगढ़ में कहा है कि गन्ना किसानों को चार साल में एक लाख 40 हजार करोड़ रुपए से अधिक का भुगतान किया गया है।’

उनकी इस टिप्पणी पर नाराज़ होते हुए राकेश टिकैत ने कहा, ‘मैं ये कह रहा हूं कि झूठ बोलने से उसका कोई लाभ होगा? हमने गन्ना दिया होगा तो उन्होंने पैसे दिए होंगे। उसमें सरकार का क्या मतलब है? क्यों जनता को बेवकूफ बना रहे हैं और क्यों उनके कागज लेकर आप भी बेवकूफ बन रहे हैं। मतलब झूठा प्रचार करने की आपकी भी हद ही हो गई।’

उनकी बातों पर चित्रा त्रिपाठी ने कहा, ‘आप जो कहें वो सच, वो जो कहें वो झूठ। मतलब आप जो कहें, उस पर भरोसा कर लिया जाए, प्रधानमंत्री जो कहें, उसको गलत मान लिया जाए?’

जवाब में राकेश टिकैत ने कहा, ‘उनको कागज पत्र गलत दिया जाता है। पीएम को जो लोग कागज लिखकर देते हैं, वो पूर्ण रूप से गलत लिखकर देते हैं।’