सात साल में फ्यूल की बेसिक एक्साइज ड्यूटी हुई कम, फिर क्यों बढ़ गए पेट्रोल-डीजल के दाम? कांग्रेस प्रवक्ता ने बताई वजह

कांग्रेस का कहना है कि सरकार अब इन उत्पादों पर बेसिक के साथ स्पेशल और एडीशनल एक्साइज ड्यूटी भी लगा रही है। बेसिक ड्यूटी में से केंद्र राज्यों को हिस्सा देता है पर बाकी दोनों से होने वाली आमदनी पूरी तरह से केंद्र के पास ही रहती है।

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कांग्रेस का कहना है कि मोदी सरकार तेल को लेकर खेल कर रही है। पहले पेट्रोल-डीजल पर बेसिक एक्साइज ड्यूटी ही लगती थी, लेकिन सरकार अब इन उत्पादों पर बेसिक के साथ स्पेशल और एडीशनल एक्साइज ड्यूटी भी लगा रही है। बेसिक ड्यूटी में से केंद्र राज्यों को हिस्सा देता है पर बाकी दोनों से होने वाली आमदनी पूरी तरह से केंद्र के पास ही रहती है। केंद्र ने इसके जरिए 2014 से लेकर अब तक 22 लाख करोड़ रुपए एकत्र किए हैं।

कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने इंडिया टुडे पर डिबेट में कहा कि मोदी सरकार ने पेट्रोल और डीजल को लेकर जो नई नीति बनाई है, उसकी वजह से तेल के दाम 20 डॉलर प्रति बैरल तक गिरने के बाद भी लोगों को राहत नहीं दी गई। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल के दाम बढ़ते हैं तो लोगों को ज्यादा पैसे चुकाने पड़ते हैं लेकिन जब दाम गिरते हैं तो सरकार इसका फायदा लोगों को नहीं दे रही।

सुप्रिया ने कहा कि मोदी सरकार ने नए तरह के नियम गढ़े और 2014 के बाद से अपने तरीके से तेल से फायदा लेना शुरू कर दिया। उनका कहना है कि बेसिक एक्साइज ड्यूटी में लगातार कमी की जा रही है। जबकि स्पेशल और एडीशनल एक्साइज ड्यूटी को लगातार बढ़ाया जा रहा है। इसकी वजह से राज्यों के पास पैसे की कमी हो गई है। केंद्र को राज्यों को 7 लाख करोड़ रुपए देने हैं।

ऐंकर राजदीप सरदेसाई के सवाल पर कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि सरकार ने एक माह के भीतर ही एलपीजी के दाम 200 रुपए तक बढ़ा दिए, क्योंकि सरकार समझ ही नहीं पा रही है कि करे तो क्या करे। उनका कहना था कि राजस्थान सरकार ने अपना वैट कम करके लोगों को राहत देने का काम किया है। कांग्रेस नीत सरकारें हरसंभव उपाय करके लोगों को राहत पहुंचाने की कोशिश कर रही हैं।

ऐंकर ने उनसे सवाल किया गया था कि राज्य सरकारें भी तो तेल के खेल में अपना फायदा देख रही हैं तो केवल केंद्र को दोष क्यों देना। सुप्रिया ने कहा कि मोदी सरकार के समय में पेट्रोल डीजल का इंपोर्ट लगातार बढ़ा है। सरकार ने तेल की खोज करने वाली सरकारी कंपनी ओएनजीसी के पर कतर दिए हैं। 2014 में कंपनी का बजट 12 हजार करोड़ था, अब इसे लगातार कम किया जा रहा है। इससे तेल के दाम अनियंत्रित होते जा रहे हैं।