सावरकर के मुद्दे पर बोले मोहन भागवत, 2014 तक सच को दबाया गया, बताया- कैसे थे RSS संग उनके रिश्ते

उन्होंने कहा कि बाबा साहेब अंबेडकर सावरकर का सम्मान करते थे। उनके मत में अंतर था लेकिन वो एक-दूसरे को समझते थे। जैसा आज के नेताओं के बीच होता है, वैसा पहले नहीं था।

Mohan Bhagwat भागवत ने कहा कि डॉ हेडगेवार और सावरकर के बीच बहुत अच्छे रिश्ते थे और संघ के विस्तार में सावरकर के बड़े भाई ने काफी सहयोग किया। (एक्सप्रेस आर्काइव फोटोः प्रदीप दास)

विनायक दामोदर सावरकर यानी वीर सावरकर को लेकर बीते कुछ दिनों से काफी चर्चा हो रही है। इस बीच आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने RSS और सावरकर के बीच रिश्तों पर बयान दिया है।

उन्होंने कहा है कि आरएसएस और सावरकर के बीच कोई मतभेद नहीं थे। सावरकर राजनीति में थे और संघ का काम समाज को जोड़ना है। सावरकर को चुनाव लड़ना था, तो कुछ बातचीत हुई थी, लेकिन मतभेद नहीं था।

भागवत ने ये बातें न्यूज चैनल रिपब्लिक भारत को दिए इंटरव्यू में कहीं। भागवत ने कहा कि डॉ हेडगेवार और सावरकर के बीच बहुत अच्छे रिश्ते थे और संघ के विस्तार में सावरकर के बड़े भाई ने काफी सहयोग किया। मैंने भी कभी सावरकर के बारे में कुछ गलत नहीं कहा।

उन्होंने कहा कि बाबा साहेब अंबेडकर सावरकर का सम्मान करते थे। उनके मत में अंतर था लेकिन वो एक-दूसरे को समझते थे। जैसा आज के नेताओं के बीच होता है, वैसा पहले नहीं था।

उन्होंने कहा कि मतभेद होने पर लोग पहले मन में द्वेष और शत्रुता नहीं पालते थे। वो लोग उदार मानसिकता वाले थे। भागवत ने ये भी कहा कि मतभेद होने पर विचारों का विरोध हो सकता है, लेकिन व्यक्ति का सम्मान होता है।

बता दें कि इससे पहले सावरकर पर दिए गए अपने संबोधन में संघ प्रमुख भागवत ने कहा था कि आजादी के बाद से सावरकर को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है और इस कड़ी में अगला नंबर विवेकानंद का है।

भागवत ने ये बातें सावरकर पर एक पुस्तक के विमोचन कार्यक्रम में कही थीं। उन्होंने कहा कि आज के दौर में लोगों को सावरकर के बारे में सही जानकारी नहीं है।

उन्होंने कहा था कि आज लोग सावरकर और संघ पर टिप्पणी करते हैं, अगला नंबर स्वामी दयानंद, विवेकानंद और स्वामी अरविंद का होगा।

भागवत ने कहा कि अगर उस समय सभी ने जोर से बोला होता तो देश का विभाजन नहीं होता। लेकिन आज लोग कहते हैं कि ये वीर सावरकर का हिंदुत्व है, ये विवेकानंद का हिंदुत्व है। जबकि हिंदुत्व तो केवल एक ही है, वो पहले भी था और आखिर तक रहेगा।

उन्होंने कहा कि अशफाक उल्लाह खान ने कहा था कि मरने के बाद वह भारत में ही जन्म लेंगे। ऐसे महान लोगों की आवाज को गूंजना चाहिए।