सीपी जोशी के जरिए तब राहुल गांधी के करीब आना चाहते थे चरणजीत सिंह चन्नी! कैप्टन अमरिंदर के खिलाफ कर चुके हैं बगावत

मनराज ग्रेवाल शर्मा की रिपोर्ट के मुताबिक, अमरिंदर सिंह के खिलाफ कांग्रेस विधायकों में बगावत से बहुत पहले रामदसिया समुदाय से ताल्लुक रखने वाले चन्नी पार्टी में दलितों की बड़ी संख्या के मद्देनजर मंत्रिमंडल में अधिक से अधिक प्रतिनिधित्व की मांग कर रहे थे।

मनराज ग्रेवाल शर्मा।

पंजाब में कांग्रेस की अंदरूनी कलह और कैप्टन अमरिंदर सिंह के इस्तीफे के बाद वरिष्ठ दलित नेता चरणजीत सिंह चन्नी को रविवार को पार्टी विधायक दल का नया नेता चुना। वह सोमवार (20 सितंबर, 2021) सुबह 11 बजे सूबे के अगले सीएम के तौर पर शपथ लेंगे। वह राज्य के पहले दलित नेता हैं, जो प्रदेश के मुख्यमंत्री होंगे। 58 बरस के चन्नी पेशे से वकील रहे हैं। उनके पास एमबीए की डिग्री भी है। कहा जाता है कि सीपी जोशी के जरिए वह राहुल गांधी के करीब आना चाहते थे, जबकि वह अमरिंदर के खिलाफ बगावत भी कर चुके हैं।

चन्नी दलित सिख (रामदसिया सिख) समुदाय से ताल्लुक रखते हैं और अमरिंदर सरकार में तकनीकी शिक्षा मंत्री थे। वह रूपनगर जिले के चमकौर साहिब विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं। वह इस क्षेत्र से साल 2007 में पहली बार विधायक बने और इसके बाद लगातार जीत दर्ज की। चन्नी शिरोमणि अकाली दल-भाजपा गठबंधन के शासनकाल के दौरान साल 2015-16 में विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष भी थे।

विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले चन्नी को मुख्यमंत्री बनाकर कांग्रेस सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश में है। प्रदेश में 30 प्रतिशत से अधिक दलित आबादी है। कांग्रेस का यह कदम इस मायने में महत्वपूर्ण है कि भाजपा ने पहले कहा था कि पंजाब में उसकी सरकार बनने पर दलित को मुख्यमंत्री बनाया जाएगा। बसपा के साथ गठबंधन करने वाले शिरोमणि अकाली दल ने दलित उप मुख्यमंत्री बनाने का वादा किया है। आम आदमी पार्टी भी दलित समुदाय को लुभाने के लिए लगातार प्रयासरत है।