सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को लगाई फटकार, कहा- सोशल मीडिया पर ऑक्सीजन, बेड की शिकायत गलत नहीं, कार्रवाई हुई तो अवमानना

शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से वैक्सीन के दामों, दवाइयों और ऑक्सीजन की किल्लत को लेकर भी जवाब तलब किया।

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शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि सोशल मीडिया पर ऑक्सीजन, बेड, वेंटिलेटर या अन्य स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की शिकायत गलत नहीं है और इसे किसी भी हालत में दबाया नहीं जाना चाहिए। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर इन तरह की शिकायतों को लेकर किसी भी तरह की प्रताड़ना होती है तो उसे अदालत की अवमानना माना जाएगा।   

शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ की पीठ ने कहा कि किसी भी तरह की सूचनाओं पर रोक नहीं लगाया जाना चाहिए। सूचनाओं पर रोक न्याय की बुनियादी अवधारणा के खिलाफ है। इसलिए सभी राज्यों और उसके डीजीपी को यह को यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि सोशल मीडिया पर स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को लेकर नागरिकों के द्वारा की जा रही शिकायत को गलत सूचना नहीं कहा जा सकता है। बता दें कि पिछले दिनों उत्तरप्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने यह आदेश दिया था कि अगर कोई डराने वाली ‘अफवाह’ सोशल मीडिया पर फैलाएगा तो उसके खिलाफ केस दर्ज किया जाएगा।

इसके अलावा शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से वैक्सीन के दामों, दवाइयों और ऑक्सीजन की किल्लत को लेकर भी जवाब तलब किया। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से वैक्सीन को लेकर सवाल पूछते हुए कहा कि वैक्सीन निर्माता टीके की एक डोज के लिए 300 या 400 रुपए ले रहे हैं तो क्या हम एक राष्ट्र के रूप में सभी टीकों को खरीद कर राज्यों के बीच बांट  सकते हैं। जिससे कीमतों में कोई अंतर नहीं हो। पीठ ने कहा कि केंद्र को राष्ट्रीय टीकाकरण मॉडल अपनाना चाहिए क्योंकि गरीब आदमी टीका के लिए भुगतान करने में सक्षम नहीं होगा। साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि हम निर्देश नहीं दे रहे हैं लेकिन आपको इस पर गौर करना चाहिए।

इसके अलावा ऑक्सीजन को लेकर पीठ ने कहा कि दिल्ली सहित कई अन्य राज्यों में भी ऑक्सीजन की किल्लत हो रही है। लोग ऑक्सीजन के लिए भटक रहे हैं। इसपर केंद्र सरकार की तरफ से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि हमें ऑक्सीजन की इतनी ज्यादा मांग की उम्मीद नहीं थी लेकिन हमने राज्यों को उनकी जरूरत बताने को कहा है ताकि जरूरत के हिसाब से ऑक्सीजन का वितरण किया जा सके।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि अग्रिम मोर्चे पर कार्य कर रहे डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों को भी इलाज के लिए अस्पताल में बिस्तर नहीं मिल रहे हैं। हमें 70 साल में स्वास्थ्य संरचना की जो विरासत मिली है वह अपर्याप्त है और स्थिति काफी खराब है। साथ ही पीठ ने सुझाव देते हुए कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र चरमराने के कगार पर है और इस संकट में सेवानिवृत्त डॉक्टरों और अधिकारियों को दोबारा काम पर रखा जा सकता है।