सुप्रीम कोर्ट में बोले यूनिटेक के पूर्व मालिक, मेरे बच्चों को भी किया जाए गिरफ्तार, जज हुए नाराज

चंद्रा परिवार को मनी लॉन्ड्रिंग से लेकर गबन तक के आरोपों का सामना करना पड़ रहा है।

Sanjay Chandra संजय चंद्रा को 2017 में उनके भाई अजय के साथ उन लाखों लोगों को ठगने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था, जिन्होंने घर खरीदे थे और वो कभी नहीं बने। (Photo Source: ANI)

यूनिटेक मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान बुधवार को कुछ ऐसा हुआ, जिससे जज नाराज हो गए और उन्हें वकील से कहना पड़ा कि कोर्ट में अपनी बात रखने का एक तरीका होता है।

दरअसल यूनिटेक के पूर्व प्रमोटर संजय चंद्रा का कोर्ट में पक्ष रख रहे वकील ने अपने मुवक्किल की ओर से कहा कि मेरे बच्चों को भी गिरफ्तार करो। इस दौरान उनकी आवाज काफी तेज हो गई, जिसके बाद जज ने कहा कि अपनी आवाज ऊंची ना करें और हमारी बात सुनें।

बता दें कि यूनिटेक के पूर्व प्रमोटर संजय चंद्रा को 2017 में उनके भाई अजय के साथ उन लाखों लोगों को ठगने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था, जिन्होंने घर खरीदे थे और वो कभी नहीं बने।

चंद्रा परिवार को अब मनी लॉन्ड्रिंग से लेकर गबन तक के आरोपों का सामना करना पड़ रहा है। सोमवार को संजय चंद्रा की पत्नी प्रीति को उसके 80 वर्षीय पिता रमेश चंद्र के साथ गिरफ्तार किया गया था।

विकास सिंह ने अपने मुवक्किल की ओर से शिकायत करते हुए कहा, ‘आपने मेरे पिता और मेरी पत्नी को गिरफ्तार किया है, अब मेरे बच्चों को भी गिरफ्तार करें। हम सभी को सलाखों के पीछे डाल दो।’

वकील विकास सिंह ने कहा कि अदालत को जांच रिपोर्ट को साझा करना चाहिए, जिससे उनके मुवक्किल आरोपों का खंडन कर सकें। उन्होंने कहा कि वे कानूनी रूप से इस रिपोर्ट के पाने के हकदार हैं।

उन्होंने कहा कि मैं नहीं चाहता कि आपकी लॉर्डशिप बाद में ये कहे कि आपने समय पर एक्शन नहीं लिया। मुझे यकीन है कि अदालत के पास चंद्रा परिवार के खिलाफ कुछ भी व्यक्तिगत नहीं है।

वकील की दलील पर न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने कहा कि इससे पहले कि आप अदालत के खिलाफ आरोप लगाएं, आप यह समझें कि आपकी भाषा क्या है? यह बहस करने का तरीका नहीं है।

बता दें कि प्रवर्तन निदेशालय ने अदालत में कहा था कि चंद्र बंधुओं को पांच हफ्ते पहले दिल्ली की तिहाड़ जेल से मुंबई की अलग जेलों में ले जाया गया था। एजेंसी ने यह भी कहा कि चंद्रा बंधुओं ने जेल अधिकारियों के साथ मिलीभगत की थी, जिन्होंने उन्हें जेल के भीतर से अपना व्यवसाय संचालित करने में मदद की।

एजेंसी ने यह भी कहा कि चंद्रा बंधुओं ने एक गुप्त कार्यालय बनाया था, जहां उन्होंने अपने खिलाफ जांच से संबंधित जानकारी छिपाई थी।

गौरतलब है कि बुधवार को सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर तिहाड़ के अधिकारियों के एक समूह को चंद्रा बंधुओं की अवैध रूप से मदद करने के आरोप में निलंबित कर दिया गया है।

बता दें कि 2017 में, सरकार को यूनिटेक के प्रबंधन को संभालने की अनुमति दी गई थी। ये एक बड़ा हस्तक्षेप था जिसमें सरकार ने कहा था कि वह उन लोगों की मदद करेगी जिन्होंने कंपनी को उन घरों के लिए भुगतान किया था जो उन्हें कभी नहीं दिए गए थे।