सुबह से शाम मोदी चालीसा पढ़ती हो फिर भी बोलने की आज़ादी नहीं? पत्रकार पर भड़क गए फ़िल्ममेकर

बॉलीवुड फिल्ममेकर अशोक पंडित सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहते हैं। इन दिनों तालिबान और अफगानिस्तान का मु्दा देश में गरमाया हुआ है, जिस पर फिल्मेकर अशोक पंडित भी बेबाकी से अपनी राय रखते नजर आ रहे हैं। हाल ही में अशोक पंडित का एक पोस्ट सामने आया जिसमें वह तालिबान और भारत की तुलना […]

pm narendra modi, srinivas bv भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (फोटो सोर्स- इंडियन एक्सप्रेस)

बॉलीवुड फिल्ममेकर अशोक पंडित सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहते हैं। इन दिनों तालिबान और अफगानिस्तान का मु्दा देश में गरमाया हुआ है, जिस पर फिल्मेकर अशोक पंडित भी बेबाकी से अपनी राय रखते नजर आ रहे हैं। हाल ही में अशोक पंडित का एक पोस्ट सामने आया जिसमें वह तालिबान और भारत की तुलना कर रही एक पत्रकार को सटीक जवाब देते दिखे।

दरअसल, एक पत्रकार ने मोदी सरकार पर तंज कसते हुए एक ट्वीट शेयर किया था जिसका करारा जवाब अशोक पंडित ने दिया। आरफा खानूम शेरवानी नाम की एक महिला पत्रकार ने पत्रकार चरण श्रीवास्तव का एक पोस्ट री-ट्वीट कर तंज भरे अंदाज में लिखा था- ‘2014 : ‘हमने मोदी जी को विकास के लिए वोट दिया है, वो भारत को विश्व गुरू बनायेंगे’, 2021: ‘महंगाई, बेरोज़गारी, पेट्रोल के दाम बढ़ रहे हैं तो क्या हुआ, हम तालिबान से बेहतर हैं, भारत में बोलने की आज़ादी है, ज़िंदा रहने की आज़ादी है।’

आरफा ने पत्रकार चरण श्रीवास्तव के इस पोस्ट पर रिएक्ट किया था- ‘एक जमाना था जब हम सीरिया, लेबनान, अफगानिस्तान, तुर्की जैसे देशों के बारे में सोचते तक नहीं थे। आज लोग भारत की तुलना अफगानिस्तान से करते हुए बता रहे हैं कि हम उनसे बेहतर है। कम से कम यहां तालिबान की तरह जुल्म तो नहीं हो रहा। ऐसे लोगों की मानसिकता को क्या कहा जाए #TalibanTerror’

आरफा के इस पोस्ट पर अशोक पंडित बिफर पड़े। उन्होंने करारा जवाब देते हुए लिखा- ‘मुझे नहीं पता था की महंगाई की वजह से आप सड़कों पर कटोरा लेकर भीक मांग रही हो! सुबह से शाम तक मोदी चालीसा पड़ती रहती हो और कहती हो की बोलने की आज़ादी नहीं है ! चीन ने पैसे भेजने बंद कर दिए हैं क्या?’

अशोक पंडित के इस पोस्ट को देख कर ढेरों लोगों के रिएक्शन सामने आने लगे। जे पी शर्मा नाम के यूजर बोले- ‘हर उस आदमी को अपना मजहब बदल लेना चाहिए जिसका मजहब मानवता नहीं सिखाता। 56 देश उन बेचारे लुटे पीटे लोगों को जगह नहीं दे रहे जो उन्हींं के मजहब के हैं। जो मजहब अपने लोगों के ही प्रति मानवता नहीं सिखाता तो सोचो दूसरे के प्रति कैसा होगा। हिन्दू बनो औए जीयो और जीने दो वो भी सुख से।’

प्रदीप नाम के शख्स ने कहा- ‘जो कल तक कहते थे कि “हिन्दुस्तान” में डर लगता है, वो अब सलाह दे रहे हैं कि “हिन्दुस्तान” में “अफ़ग़ानियों” को शरण दी जानी चाहिए।’ नैनेश भट्ट ने लिखा- ‘हमने तो ऐतिहासिक फैसले लेने के लिए वोट दिया, और वो कर भी रहे हैं, इसलिए 2024 में भी देंगे!’