सुमित : एक और उपलब्धि की ओर पैरालंपिक चैंपियन

तोक्‍यो पैरालंपिक खेलों में भारतीय खिलाड़ियों ने बेहतरीन प्रदर्शन किया। इस बार के पैरालंपिक खेल ऐतिहासिक और यादगार बन गए।

सुमित अंतिल। फाइल फोटो।

तोक्‍यो पैरालंपिक खेलों में भारतीय खिलाड़ियों ने बेहतरीन प्रदर्शन किया। इस बार के पैरालंपिक खेल ऐतिहासिक और यादगार बन गए। भारत को पांच स्वर्ण समेत रेकॉर्ड 19 पदक मिले। ‘पैरालंपिक कमिटी आॅफ इंडिया’ की तरफ से कई विजेताओं के नाम खेल पुरस्कारों के लिए भेजे गए हैं। भाला फेंक एथलीट सुमित अंतिल और महिला निशानेबाज अवनि लेखरा के नाम अर्जुन अवॉर्ड के लिए भेजे गए हैं।

उनके अलावा निशानेबाज मनीष नरवाल, ऊंची कूद एथलीट शरद कुमार, पैरा शटलर प्रमोद भगत और भाला फेंक खिलाड़ी सुंदर सिंह गुर्जर के नाम मेजर ध्यान चंद खेल रत्न अवॉर्ड के लिए नाम किए गए हैं। ‘पैरालंपिक कमेटी आॅफ इंडिया’ की अध्यक्ष दीपा मलिक ने कहा, ‘इस बार सुमित और अवनि को अर्जुन अवॉर्ड के लिए भेजा गया है, दोनों ने अपने पदक से देश को गौरवान्वित किया है।

अवॉर्ड मिलने से खिलाड़ी 2024 पैरालंपिक खेलों में और बेहतर करने के लिए प्रेरित होंगे।’ सुमित और अवनि दोनों ने वर्ल्ड रेकॉर्ड के साथ गोल्ड मेडल जीते थे।अवनि ने गोल्ड के अलावा कांस्य पदक भी अपने नाम किया था। सुमित अंतिल ने 68.55 मीटर भाला फेंककर विश्व रेकॉर्ड भी कायम करने में सफलता पाई। भाला फेंक स्पर्धा में सुमित अंतिल ने निर्णायक दौर की प्रतियोगिता के दौरान पहले ही प्रयास में 66.95 मीटर का भाला फेंककर विश्व कॉर्ड बना दिया था। दूसरे प्रयास में सुमित ने 68.08 मीटर का भाला फेंका, तीसरे प्रयास में उन्होंने 68.55 मीटर दूर भाला फेंका।

सड़क हादसे में अपना एक पैर गंवाने वाले सुमित हरियाणा से हैं। जब सुमित सात साल के थे, तभी उनके पिता की बीमारी से मौत हुई थी। सात जून 1998 को पैदा होने वाले सुमित का यह सफर कठिनाइयों भरा रहा। छह साल पहले हुए सड़क हादसे में एक पैर गंवा दिया। बावजूद इसके उन्होंने जिंदगी में कभी हार नहीं मानी। हर परिस्थिति का डटकर सामना किया।

सुमित जब सात साल के थे, तब वायुसेना में तैनात पिता की मौत हो गई। तीन बेटियों और इकलौते बेटे को पालना मां के लिए आसान नहीं था। 2015 की एक शाम 17 साल के सुमित की बाइक को किसी ट्रैक्टर-ट्रॉली ने टक्कर मार दी। दुर्घटना में हमेशा-हमेशा के लिए एक पैर गंवाना पड़ा। कई महीनों तक अस्पताल में भर्ती रहने के बाद साल 2016 में सुमित को नकली पैर लगाया गया। खेलों के प्रति तो शुरू से ही रुझान था। कोच वीरेंद्र धनखड़ ने उनका मार्गदर्शन किया। दिल्ली में कोच नवल सिंह ने उन्हें भाला फेंक के गुर सिखाए।

साल 2018 में एशियाई चैंपियनशिप में पांचवीं रैंक मिली। अगले साल 2019 में वर्ल्ड चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीता, फिर इसी साल हुए राष्ट्रीय खेलों में सोना जीतकर अपनी परेशानियों को उपलब्धियों के आगे बौना साबित कर दिया।