सेंट्रल विस्टाः दिल्ली HC के फैसले को SC में चुनौती दे बोला याचिकाकर्ता- जुर्माना ज्यादा, इससे लोग होंगे हताश

हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान तीखी बहस हुई थी। यहां तक कि ‘ऑशविट्ज़’ का हवाला दिया गया और परियोजना को “मौत का किला” कहा गया। बता दें कि ऑशविट्ज़ का अभिप्राय उस जगह से है जहां नाजियों द्वारा यहूदियों पर जुल्म किए जाते थे।

नई दिल्ली स्थित राजपथ वाले इलाके में सेंट्रल विस्टा के रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट से जुड़े काम के दौरान का दृश्य। (एक्सप्रेस फोटोः अमित मेहरा)

सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट पर रोक लगाने से हाल ही में दिल्ली हाईकोर्ट इनकार कर दिया था। साथ ही अदालत ने याचिकाकर्ता पर एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया था। अब अदालत के फैसले के विरोध में याचिकाकर्ता अन्या मल्होत्रा ने सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगायी है। मल्होत्रा की तरफ से कहा गया है कि जुर्माना ज्यादा, इससे लोग हताश हो जाएंगे।

याचिकाकर्ता की तरफ से कहा गया है कि हाईकोर्ट में दायर उनकी याचिका पूरी तरह से जन स्वास्थ्य और जन सुरक्षा को लेकर थी। लेकिन उसके उद्देश्य को समझा नहीं गया और न ही कोई जांच कराई गयी। इस प्रोजेक्ट को इसलिए रोकने की मांग की गयी थी क्योंकि उसमें सुरक्षा मानदंडों का पालन नहीं हो रहा था। वहां पर कोरोना संक्रमण से बचाव और उसे फैलने से रोकने के लिए पर्याप्त उपाय नहीं किए गए थे।

बताते चलें कि हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान तीखी बहस हुई थी। यहां तक कि ‘ऑशविट्ज़’ का हवाला दिया गया और परियोजना को “मौत का किला” कहा गया। बता दें कि ऑशविट्ज़ का अभिप्राय उस जगह से है जहां नाजियों द्वारा यहूदियों पर जुल्म किए जाते थे।

कोर्ट में केंद्र ने दलील दी थी कि जनहित याचिका “कुछ व्यक्तियों के घमंड को संतुष्ट करने” के लिए है। जवाब में याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया था कि सरकार संदेशवाहक को ही गोली मारने का काम कर रही है और सार्वजनिक स्वास्थ्य के बारे में दिए जा रहे संदेश की परवाह नहीं कर रही है। याचिका में कहा गया था कि परियोजना स्थल पर निरंतर निर्माण “सुपर स्प्रेडर” साबित हो सकता है। जो कि मजदूरों के लिए खतरनाक है।

बताते चलें कि देश की राजधानी दिल्ली में 22 लाख वर्गफीट भूभाग पर सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के तहत नए संसद भवन और सचिवालय का निर्माण हो रहा है। इस परियोजना पर 20 हजार करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है। कोरोना संकट के दौर में शुरु हुए इस प्रोजेक्ट को लेकर विपक्षी दलों की तरफ से काफी विरोध किए गए थे।