हमने तो कहा था देश में ‘इंडिया फॉर सेल’ का बोर्ड लगा है- एयर इंडिया की नीलामी पर बोले राकेश टिकैत, कांग्रेस नेता ने भी कसा तंज

एयर इंडिया की नीलामी पर राकेश टिकैत और अल्का लांबा ने ट्वीट किया है। उनके अलावा मशहूर लेखकर चेतन भगत ने भी मामले पर रिएक्शन दिया है।

Air India 68 साल बाद टाटा को फिर से एयर इंडिया मिल गई है। (फोटो सोर्स- फाइल फोटो)

सरकारी कंपनी एयर इंडिया अब देश की नामी कंपनी टाटा की होने जा रही है। ब्लूमबर्ग के मुताबिक पैनल ने एयर इंडिया के लिए ट्राटा ग्रुप को चुना है। एएनआई के मुताबिक टाटा ने सबसी ऊंची बोली लगाकर जीत हासिल की है। एयर इंडिया की नीलामी को लेकर केंद्र सरकार विपक्षी दलों के निशाने पर आ गई है। भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने एयर इंडिया की नीलामी पर सरकार को घेरते हुए ट्वीट किया। उनके अलावा कांग्रेस नेता अलका लांबा भी सरकार पर तंज कसने से पीछे नहीं हटीं।

किसान नेता राकेश टिकत ने एयर इंडिया की नीलामी पर तंज कसा और लिखा, “हम तो पहले से ही कह रहे हैं कि देश में इंडिया फॉर सेल का बोर्ड लगा हुआ है। पहले नीलामी होना बेइज्जती मानी जाती थी, अब यह इज्जत का विषय है। आज देश की एयरलाइंस एयर इंडिया भी नीलाम हो गई है।”

वहीं कांग्रेस नेता अलका लांबा ने एयर इंडिया की नीलामी पर चुटकी लेते हुए लिखा, “इसी के साथ एयर इंडिया को टाटा।” मशहूर लेखक चेतन भगत ने मामले पर रिएक्शन देते हुए लिखा, “तो ऐसा लग रहा है कि यह टाटा एयर इंडिया होने जा रही है। इसका मतलब यह है कि सरकार एयर इंडिया को टाटा कह रही है और एयर इंडिया अब टाटा एयर इंडिया बनने जा रही है। दोनों ही सही हो सकते हैं।”

उनके अलावा सोशल मीडिया यूजर भी इस मामले पर खूब कमेंट कर रहे हैं। विक्रम चौधरी नाम के यूजर ने लिखा, “किसी समय में देश की सरकार ने एयर इंडिया का अधिग्रहण किया था। आज वो लचर कार्यशैली की वजह से नीलाम हुई। बधाई हो न्यू इंडिया के निवासियों को।”

संजय नाम के यूजर ने तंज कसते हुए लिखा, “एयर इंडिया को टाटा ग्रुप के हाथों बेचने के लिए मोदी जी को समस्त देश धन्यवाद व्यक्त करता है। और कुछ देश की संपत्ति बची है तो कृप्या मोदी जी को इन्फॉर्म करें, जल्द ही उसे भी बेचा जाएगा।”

विकास नाम के यूजर ने लिखा, “जिस टाटा ग्रुप से इंदिरा गांधी ने एयर इंडिया लेकर हवाई जहाजों का सरकारीकरण किया था, उसी टाटा ग्रुप ने आज फिर मोदी सरकार से एयर इंडिया खरीद ली है। यह सब इतिहास में दर्ज रहेगा कि कौन सी सरकार देश के लिए बनी थी और कौन केवल मुट्ठीभर पूंजीपतियों के लिए।”