हरियाणा में ‘गोरख धंधा ‘ शब्द पर रोक, गोरखनाथ समुदाय की अपील पर सीएम खट्टर का फैसला

मुख्यमंत्री ने कहा कि गोरखनाथ संत थे और किसी भी आधिकारिक भाषा, भाषण या किसी भी संदर्भ में इस शब्द का प्रयोग उनके अनुयायियों की भावनाओं को आहत करता है।

Haryana, Farmers Movement हरियाणा के सीएम मनोहर लाल खट्टर। (इंडियन एक्सप्रेस फाइल फोटो)

हरियाणा सरकार ने शब्द ‘गोरख धंधा’ के इस्तेमाल पर पाबंदी लगा दी है जिसका इस्तेमाल आमतौर पर अनैतिक कामों के बारे में बताने के लिए किया जाता है। बुधवार को जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, गोरखनाथ समुदाय के एक प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने इस संबंध में निर्णय लिया।

प्रतिनिधिमंडल ने खट्टर से इस शब्द के इस्तेमाल पर पाबंदी लगाने का आग्रह किया क्योंकि यह संत गोरखनाथ के अनुयायियों की भावनाओं को आहत करता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि गोरखनाथ संत थे और किसी भी आधिकारिक भाषा, भाषण या किसी भी संदर्भ में इस शब्द का प्रयोग उनके अनुयायियों की भावनाओं को आहत करता है, इसलिए किसी भी संदर्भ में इस शब्द का इस्तेमाल पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया गया है।

मालूम हो कि गोरखनाथ एक संत थे और उन्हें समर्पित एक मंदिर सोनीपत से 20 किलोमीटर दूर गोर्ड गांव में स्थित है। इससे पहले पिछले महीने खबर सामने आई थी कि मध्यप्रदेश में विधानसभा सचिवालय ने असंसदीय शब्दों की डिक्शनरी तैयार की है। इसमें वो शब्द हैं जिनका प्रयोग विधायक सदन में नहीं कर सकेंगे। शब्दों में ‘पप्पू, फेंकू, बंटाधार, चोर, झूठा, मूर्ख’ जैसे शब्द विधायक सदन में नहीं बोल सकेंगे।

यहां तक कि मर्यादित भाषा के लिए विधायकों-मंत्रियों को प्रशिक्षण देने की बात कही गयी थी। सचिवालय ने जिस तरीके से असंसदीय शब्दों की डिक्शनरी तैयार की है, उसी तरीके से विधायकों और मंत्रियों का ट्रेनिंग प्रोग्राम भी तैयार किया।

ट्रेनिंग प्रोग्राम के तहत विधानसभा अध्यक्ष खुद बताएंगे कि सदन की कार्यवाही के दौरान कैसा व्यवहार करना है, किन शब्दों का इस्तेमाल करना है और किन शब्दों का इस्तेमाल नहीं करना है।

क्यों पड़ी डिक्शनरी बनाने की जरूरत?: बता दें कि कि मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र में राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान कांग्रेस के जीतू पटवारी ने जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट को बिकाऊ कह दिया था। पटवारी ने वन मंत्री विजय शाह के अभिनेत्री विद्या बालन के साथ डिनर करने को लेकर भी आपत्तिजनक शब्द बोले थे।

बीजेपी विधायक भी विधानसभा में पप्पू और बंटाधार जैसे शब्दों का इस्तेमाल करने से परहेज नहीं करते, इस पर रोक लगाने के लिए मध्य प्रदेश विधानसभा सचिवालय की तरफ से यह फैसला लिया गया था।