हर बार गर्म करके ठंडा कर देते हो, राज ठाकरे की यूनिफार्म सिविल कोड और जनसंख्या नियंत्रण कानून की मांग पर तंज

गौरतलब है कि इससे पहले राज ठाकरे ने महाराष्ट्र में मस्जिदों से लाउडस्पीकर उतारने को लेकर उद्धव सरकार को अल्टीमेटम दिया था। उसके बाद अब यूनिफॉर्म सिविल कोड का मुद्दा उठाया है।

Raj Thackeray, MNS मनसे प्रमुख राज ठाकरे(फोटो सोर्स: PTI)।

लाउडस्पीकर विवाद से सुर्खियों में आने वाले महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना प्रमुख राज ठाकरे ने शनिवार को ‘यूनिफॉर्म सिविल कोड’ लागू करने की बात की। पुणे में राज ठाकरे ने एक रैली को संबोधित करते हुए पीएम मोदी से अनुरोध किया कि देशभर में जल्द ही ‘यूनिफॉर्म सिविल कोड’ लागू किया जाए। वहीं उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर लोग तमाम तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।

दरअसल रैली में राज ठाकरे ने कहा, “मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अनुरोध करता हूं कि जल्द से जल्द ‘यूनिफॉर्म सिविल कोड’ लाएं। जनसंख्या नियंत्रण पर भी क़ानून लाएं।” इसके अलावा राज ठाकरे ने मांग की कि औरंगाबाद का नाम बदलकर संभाजीनगर कर दिया जाए।

गौरतलब है कि इससे पहले राज ठाकरे ने महाराष्ट्र में मस्जिदों से लाउडस्पीकर उतारने को लेकर उद्धव सरकार को अल्टीमेटम भी दिया था। जिसमें उन्होंने 3 मई तक का समय दिया था। वहीं इस अल्टीमेटम के बाद अब बाद अब यूनिफॉर्म सिविल कोड का मुद्दा उठा दिया है।

ऐसे में इस तरह के मुद्दों को उठाने पर सोशल मीडिया पर लोग उनपर तंज कस रहे हैं। एक यूजर(@jayswain03) ने राज ठाकरे को लेकर कहा, “हर वक्त गर्म करके ठंडा कर देते हो।” यूजर ने पूछा कि आखिर लाउडस्पीकर बैन करने वाले मूवमेंट का क्या हुआ।

एक अन्य यूजर(@krajeshjsr) ने लिखा, “महाराष्ट्र का ड्रामा महाराष्ट्र में ही रखिए।” वहीं शेख अयूब ने राज ठाकरे को लेकर लिखा, “ये वो हैं जो यूपी जाने से डर गये और बीमारी का बहाना बनाकर रुक गये।”

बता दें कि ठाकरे ने 5 जून अयोध्या जाने का ऐलान किया था। लेकिन यूपी में भाजपा सांसद द्वारा विरोध किये जाने के बाद उन्होंने अपनी इस यात्रा को रद्द कर दिया। इसको लेकर उन्होंने कहा, ”मेरी अयोध्या यात्रा के खिलाफ जो लोग थे, वे मुझे फंसाने की कोशिश कर रहे थे। मैंने इस विवाद में नहीं पड़ने का फैसला किया।”

दरअसल मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने रविवार को दावा किया कि उनकी अयोध्या यात्रा को लेकर हो रहे राजनीतिक घटनाक्रम में उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं को कानूनी पचड़ों में फंसाने की कोशिश थी। इसको देखते हुए उन्होंने अपनी यात्रा स्थगित कर दी।