हर मिनट 16 करोड़ रुपए प्रचार पर फूंक देते हैं- मोदी सरकार पर बिफरे पुण्य प्रसून बाजपेयी; गिनाई खामियां

कोरोना काल में हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर की नाकामियों से नाराज बाजपेयी मोदी सरकार को दोष देते हुए कहते हैं कि देश में चुनाव के दौरान 16 करोड़ रुपए फूंक दिए जाते हैं।

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पुण्य प्रसून बाजपेयी ने मौजूदा हालातों पर गुस्साते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भड़ास निकाली है। कोरोना काल में हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर की नाकामियों से नाराज बाजपेयी मोदी सरकार को दोष देते हुए कहते हैं कि देश में चुनाव के दौरान 16 करोड़ रुपए फूंक दिए जाते हैं। उन्होंने अपने ट्वीट कर कहा- दो पिलर पर टिका है भारत का लोकतंत्र! 1. प्रचार 2. प्रोपेगेंडा, हर मिनट ₹16 करोड़ फूंक दिये जाते हैं प्रचार पर।

इससे पहले भी बाजपेयी ने एक पोस्ट किया था जिसपर मोदी सरकार को ताना मारते हुए उन्होंने कहा था- ‘मां गंगा से सत्ता तक, घर से सड़क, सड़क से अस्पताल, अस्पताल से शमशान, शमशान से गंगा तक, मां गंगा ने किसे बुलाया?’

प्रसून बाजपेयी के पोस्ट पर कई लोगों के रिएक्शन सामने आने लगे। रूद्र प्रताप नाम के यूजर बोले- ‘अब तक जनता के चुने हुए जनप्रतिनिधि पूरी तरह से निष्क्रिय हैं। आवश्यकता है जनता अपने चुने हुए जनप्रतिनिधियों से सवाल करें। उनपर दबाव बनाएं और उन्हें सक्रिय भूमिका में लेकर आएं। उन्हें ये अहसास कराया जाए कि उनकी जिम्मेदारी जनता के प्रति है न कि अपने शीर्ष नेतृत्व के प्रति। लोकतंत्र।

एक यूजर ने तंज कसते हुए कहा- असल में तो आज के नेताओं की कुर्सी इन दो पिलर्स पर टिकी होती है। मगर कोई कितना भी प्रचार प्रोपेगेंडा करके अपनी छवि बना ले! सच्चाई नदी में बहती लाशों के रूप में बहती दिखती है और असलियत बताती है कि किसने कैसा काम किया।

आनंद नाम के शख्स ने कहा- वामपंथियों द्वारा निर्मित दो पिलर पर टिका है भारत का लोकतंत्र! 1. प्रचार 2. प्रोपेगेंडा लेफ्ट सर्प पत्रकारिता वाले हर मिनट ₹160 करोड़ फूंक कमाते हैं प्रचार से। सुशील कुमार नाम के यूजर ने कहा- जिस देश में आप जैसे मीडिया कर्मी होंगे उस देश का भला क्या होगा? राजनेता ना बने लोकतंत्र के चौथे स्तंभ बने रहें। देश जीतेगा।

अमोद राय नाम के यूजर बोले- ‘वो भी 16 करोड़ जो फूंके गए हैं, वह किसी नेता के बाप के दिए पैसे नहीं होते। यह वो पैसे हैं जिसे आदमी दिन रात मेहनत करता है जो खर्च करता है, उसके जमा पैसे जिसका इस्तेमाल स्वास्थ्य और शिक्षा पर होना चाहिए, नहीं होता।