हल चलाते किसान की फोटो पोस्ट कर माइकल वॉन ने उड़ाया नरेंद्र मोदी स्टेडियम का मजाक, लोगों ने सुनाई खरी-खोटी

वॉन ने बीसीसीआई पर टेस्ट क्रिकेट के अनुकूल पिचें तैयार नहीं करने का आरोप लगाया था। वॉन ने कहा था कि भारत को अपनी मनमर्जी चलाने के लिए जितनी अधिक छूट दी जाएगी उतना ही आईसीसी बेअसर नजर आएगी। इंग्लैंड की टीम चार टेस्ट मैचों की सीरीज में 1-2 से पीछे है।

Michael Vaughan, Narendra Modi Stadium

इंग्लैंड के पूर्व कप्तान माइकल वॉन अपनी टीम के खराब प्रदर्शन को स्वीकार करने की जगह भारतीय पिचों को लगातार दोष देने में लगे हुए हैं। उन्होंने दूसरे टेस्ट में हार के बाद चेन्नई की पिच का मजाक उड़ाया था और अब अहमदाबाद स्थित नरेंद्र मोदी स्टेडियम की पिच के खिलाफ लगातार बोल रहे हैं। उन्होंने इंस्टाग्राम पर हल चलाते हुए किसान की तस्वीर शेयर कर एक बार फिर से पिच का मजाक उड़ाया है।

वॉन ने फोटो शेयर करते हुए लिखा, ‘‘मैं रिपोर्ट कर सकता हूं कि चौथे टेस्ट की तैयारी बहुत अच्छी चल रही है… क्यूरेटर को जल्द ही उछाल मिलने और पांचवे दिन गेंद के घूमने की उम्मीद है।’’ उनके इस पोस्ट पर भारतीय फैन ने जमकर खरी-खोटी सुनाई है। एक फैन ने लिखा- आपने उस समय तो अपना मुंह नहीं खोला था जब मैच ड्रॉ होने के बाद वर्ल्ड कप उठाया था। एक फैन ने कहा- 46 साल का बच्चा रो रहा है। वहीं, एक यूजर ने उनके करियर पर सवाल उठाते हुए लिखा- आपकी टेस्ट में 41 और वनडे में 27 की औसत है। आपसे तो साधारण पिच पर भी नहीं खेला गया।

इससे पहले वॉन ने बीसीसीआई पर टेस्ट क्रिकेट के अनुकूल पिचें तैयार नहीं करने का आरोप लगाया था। वॉन ने कहा था कि भारत को अपनी मनमर्जी चलाने के लिए जितनी अधिक छूट दी जाएगी उतना ही अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) बेअसर नजर आएगी। इंग्लैंड की टीम चार टेस्ट मैचों की सीरीज में 1-2 से पीछे है। अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में तीसरे टेस्ट के पहले दिन से ही स्पिनरों को मदद मिलने लगी। जो रूट जैसे पार्टटाइम गेंदबाज को 5 विकेट मिल गया।

वान ने डेली टेलीग्राफ में लिखा था, ‘‘भारत जैसे शक्तिशाली देशों को इसके लिए जितनी अधिक छूट दी जाएगी आईसीसी उतना अधिक बेअसर नजर आएगा। भारत जैसी पिच तैयार करना चाहता है खेल की संचालन संस्था उसे इसके लिए छूट देती है और इससे टेस्ट क्रिकेट को नुकसान पहुंचता है। शायद प्रसारक अपने नुकसान की भरपाई की मांग करें तो ही हालात बदलेंगे। खिलाड़ियों के खराब खेलने पर वे मैच जल्दी खत्म होना स्वीकार कर सकते हैं, लेकिन मेजबान बोर्ड के ऐसी खराब पिचें बनाने पर नहीं। उनके तीन दिन खराब हुए लेकिन प्रोड्क्शन को तो पैसा देना ही है। वे खुश नहीं होंगे और आगे से टेस्ट मैचों के प्रसारण अधिकारों के लिए दो बार सोचेंगे।’’