हाईकोर्ट ने रोका, गुजरात सरकार ने कहा- हमारी बेटियों को छेड़ने वाली जिहादी ताकतों को नष्ट करने लाए हैं लव जिहाद विरोधी कानून

गुजरात के कानून मंत्री प्रदीप सिंह जडेजा ने कहा कि हम लव जिहाद कानून उन जिहादी ताकतों को नष्ठ करने के लिए आए हैं, जो हमारी बेटियों और बहनों की जिंदगियों के साथ खिलवाड़ करते हैं।

Gujarat High Court गुजरात सरकार सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी कर रही है। Photo Source- Indian Express

गुजरात हाईकोर्ट ने पिछले दिनों राज्य के लव जिहाद कानून की कुछ धाराओं पर रोक लगा दी थी, गुरुवार को इस मामले पर दोबारा सुनवाई हुई तो हाईकोर्ट अपने रुख पर कायम रहा, अब गुजरात सरकार सुप्रीम कोर्ट में इस आदेश को चुनौती देने की तैयारी कर रहा है। कानून मंत्री प्रदीप सिंह जडेजा ने कहा कि हम लव जिहाद कानून उन जिहादी ताकतों को नष्ठ करने के लिए आए हैं, जो हमारी बेटियों और बहनों की जिंदगियों के साथ खिलवाड़ करते हैं। बताते चलें कि यह सारा विवाद लव जिहाद कानून की धारा 5 को लेकर हो रहा है, जिसके अनुसार धर्म परिवर्तन से पहले जिला मजिस्ट्रेट से अनुमति लेना अनिवार्य है।

कानून के अनुसार, धर्म परिवर्तन कराने वाले शख्स को भी जिला मजिस्ट्रेट के पास इसकी सूचना देनी होगी। प्रदीप सिंह जडेजा ने कहा कि धारा 5 ही लव जिहाद कानून का मूल है। हम फर्जी विवाह रोकने के इरादे से गुजरात में इस धर्म स्वतंत्रता अधिनियम को लेकर आए हैं। उन्होंने कहा कि हम हिंदुओं के अलावा सभी धर्मों की महिलाओं की सुरक्षा के लिए दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ रहे हैं। जिहादी ताकतों द्वारा बहन बेटियों को प्रताड़ित करने वाले लोगों के खिलाफ लव जिहाद कानून का हथियार उठाया है।

उन्होंने कहा कि यह कानून कोई “राजनीतिक एजेंडा नहीं बल्कि राज्य की युवतियों की सुरक्षा के लिए किया गया एक ईमानदार प्रयास है। उन्होंने कहा कि विरोध करने वाले कुछ लोगों द्वारा इसकी गलत व्याख्य़ा की गई और हाईकोर्ट का रुख कर लिया।

बताते चलें कि गुजरात के लव जिहादी कानून की धारा 5 को फ्रीडम ऑफ रिलीजन के आधार पर हाईकोर्ट ने गैरकानूनी मानते हुए रोक लगा दी थी। इस कानून के खिलाफ जमीयत उलेमा-ए-हिंद द्वारा याचिका दायर की गई थी।

गौरतलब है कि गुजरात में रुपाणी सरकार ने 15 जून 2021 को लव जिहाद कानून को लागू किया था। हाईकोर्ट ने इस कानून की कुछ धाराओं पर रोक लगाते हुए कहा था कि इस तरह के मामलों में FIR तब तक दर्ज नहीं हो सकती है, जब तक यह साबित नहीं हो जाए कि शादी बिना मर्जी के जोर जबदरस्ती से की गई है।