1 अक्टूबर से बदल जाएगी आपकी सैलरी और काम का समय? नया श्रम कानून लागू होने के बाद आने वाले हैं कई बदलाव

चार लेबर कोड अगर लागू होते हैं तो आपको ज्यादा पीएफ का योगदान देना होगा। ऐसे में इन हैंड सैलरी कम हो सकती है।

salary cut नए लेबर कोड लागू होने के बाद पड़ेगा सैलरी पर प्रभाव। सांकेतिक तस्वीर

केंद्र सरकार जल्द ही चारों लेबर कोड का लागू कर सकती है। इससे आपकी सैलरी पर भी प्रभाव पड़ सकता है। अब तक की जानकारी के मुताबिक चारों लेबर कोड एक बार में ही लागू किए जाएंगे और यह फैसला 1 अक्टूबर तक किया जा सकता है। इन नियमों के लागू होने के बाद टेक होम सैलरी कम हो जाएगी और प्रोविडेंट फंड की लायबिलिटी बढ़ जाएगी।

जब ये कोड लागू हो जाएंगे तो बेसिक पे और प्रोविडेंट फंड की गणना करने के तरीके बदल जाएंगे। बता दें कि मंत्रालय ने चारों कोड के तहत नियम तय कर लिए थे लेकिन इन्हें लागू नहीं किया जा सका क्योंकि श्रम का मामला समवर्ती सूची में आता है।

अगर यह नियम लागू होता है तो ऑफिस का टाइम भी बढ़ जाएगा क्योंकि नए श्रम कानून में अधिकतम 12 घंटे काम करने का प्रस्ताव रखा गया है। ओएसएच कोड के प्रस्तावितन नियमों के मुताबिक 15 से 30 मिनट तक के अतिरिक्त काम को गिनकर इसे ओवरटाइम में शामिल करने का प्रस्ताव है। अगर अभी की बात करें तो 30 मिनट से कम के काम को ओवरटाइम में नहीं गिना जाता है। इन प्रस्तावित नियमों में यह भी है कि किसी भी कर्मचारी से 5 घंटे से ज्यादा लगातार काम न लिया जाए। हर पांच घंटे में आधे घंटे का रेस्ट अनिवार्य है।

कैसे पड़ेगा सैलरी पर असर?
नए प्रस्तावित नियमों के मुताबिक मूल वेतन कुल वेतना का 50 फीसदी या ज्यादा होना चाहिए। ऐसे में वेतन की पूरी संरचना बदल जाएगी। अब तक वेतन में भत्तों का हिस्सा अधिक हुआ करता था। मूल वेतन बढ़ने के बाद पीएफ भी बढ़ जाएगा। इसके बाद टेक होम सैलरी कम हो जाएगी। हालांकि रिटायरमेंट के वक्त इसका फायदा मिलेगा।

बढ़ जाएगी रिटायरमेंट की राशि
वेतन की संरचना बढ़ने के बाद ग्रेच्युटी और पीएफ में योगदान बढ़ जाएगा। जब पीएफ बढ़ेगा तो कंपनियों को भी अपने कर्मचारियों के पीएफ में ज्यादा योगदान देना होगा। इसके बाद लोगों को रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली राशि भी बढ़ जाएगी।