13 करोड़ से ज्यादा गरीबों वाले देश में एक हजार से अधिक खरबपति, महज 10 फीसदी लोगों के पास 77% संपत्ति

एक तरफ देश में खरबपतियों की संख्या एक हजार के पार हो गई है, तो दूसरी ओर गरीबी 45 साल के उच्च स्तर पर है। एक साल में गरीबों की संख्या 6 करोड़ बढ़कर 13 करोड़ से ज्यादा हो गई है।

Poverty In India भारत 45 साल बाद Mass Poverty वाला देश बन गया है। (Express Photo)

भारत में आर्थिक असमानता (Economic Inequality) यानी अमीरों और गरीबों के बीच की खाई चिंताजनक तरीके से बढ़ रही है। एक तरफ अमीर (Richest Indian) और अमीर हो रहे हैं, दूसरी और गरीबों की गरीबी बेतहाशा बढ़ रही है। एक रिपोर्ट बताती है कि पहली बार भारत में खरबपतियों की संख्या एक हजार के पार हो गई है, तो दूसरी रिपोर्ट के अनुसार इसी अवधि में देश में करीब छह करोड़ लोग गरीब हो गए हैं। इस तरह भारत फिर से व्यापक गरीबी (Mass Poverty) वाला देश बन गया है।

साल भर में छह करोड़ लोग हुए गरीब

प्यू रिसर्च सेंटर (Pew Research Centre) ने विश्वबैंक (World Bank) के डेटा का अध्ययन कर कुछ चौंकाने वाले निष्कर्ष दिए हैं। इसके अनुसार, भारत में एक दिन में 150 रुपये भी नहीं कमा पाने वाले (क्रय शक्ति पर आधारित आय) लोगों की संख्या में पिछले एक साल में बेतहाशा वृद्धि हुई है। महामारी के चलते तेज हुई आर्थिक सुस्ती के चलते ऐसे लोगों की संख्या एक साल में छह करोड़ बढ़ गई है।

45 साल बाद पुन: Mass Poverty वाला देश बना भारत

इस तरह देश में कुल गरीबों की संख्या अब 13.4 करोड़ पर पहुंच गई है। इसका अर्थ यह हुआ कि भारत 45 साल बाद फिर से मास पोवर्टी यानी व्यापक स्तर पर गरीबों वाला देश बन गया है। 1974 के बाद ऐसा पहली बार हुआ है, जब देश में गरीबों की संख्या बढ़ी है।

प्यू रिसर्च सेंटर के निष्कर्षों पर यकीन करें तो महामारी के बाद देश का मध्यम वर्ग सिकुड़ गया है। आम तौर पर मिडल क्लास (Middle Class) में आबादी के कम होने का कारण लोगों का अपर क्लास यानी समृद्ध वर्ग में शामिल हो जाना रहता है। हालांकि इस मामले में स्थिति उलट है। यहां मिडल क्लास का एक तिहाई हिस्सा गरीबों की श्रेणी में पहुंच गया है। इसमें बड़ा हिस्सा शहरी आबादी का है।

तीन दशक से बढ़ रही Economic Inequality

ऑक्सफेम इंडिया (Oxfam India) की एक हालिया रिपोर्ट भी चिंताजनक बातें सामने लाती है। इसके अनुसार, भारत में आर्थिक असमानता तेजी से बढ़ रही है। ऐसा नहीं है कि महामारी के आने से आर्थिक असमानता की स्थिति उत्पन्न हुई है। यह पिछले तीन दशक से हो रहा है। पिछले तीन दशक से अमीरों का धन बढ़ता जा रहा है और गरीबों के हिस्से की संपत्ति कम होती जा रही है।

भारत के बजट से भी ज्यादा है चुनिंदा लोगों की संपत्ति

ऑक्सफेम की इस रिपोर्ट में 2017 तक के आंकड़े लिए गए हैं। यह रिपोर्ट बताती है कि देश के महज 10 प्रतिशत समृद्ध लोगों के पास 77 प्रतिशत संपत्ति है। 2017 में भारत में बढ़ी कुल संपत्ति में से 73 प्रतिशत हिस्सा महज एक प्रतिशत अमीरों के हिस्से में गया। वहीं दूसरी ओर गरीबों की संपत्ति में महज एक प्रतिशत का इजाफा हुआ। सिर्फ एक प्रतिशत अमीर आबादी की कुल संपत्ति भारत के बजट से भी ज्यादा है।

10 साल में 10 गुना हो गई खरबपतियों की संख्या

एक दिन पहले जारी आईआईएफएल वेल्थ हुरुन इंडिया रिच लिस्ट 2021 (IIFL Wealth Hurun India Rich List 2021) के अनुसार, एक दशक में देश में खरबपतियों की संख्या 10 गुना से भी अधिक हो गई है। जहां 2011 में एक हजार करोड़ रुपये की संपत्ति वाले लोगों की संख्या 100 थी, 2021 में इनकी संख्या 1007 हो गई है। इन अमीरों ने पिछले साल हर रोज 2,020 करोड़ रुपये की कमाई की है, जबकि आबादी का बड़ा हिस्सा रोज 150 रुपये कमाने में असमर्थ हो रहा है।

इसे भी पढ़ें:

अर्थशास्त्री की राय: नीतिगत स्तर पर Middle Class को नजरअंदाज करना भी कारण

सेंटर फोर इकोनॉमिक पॉलिसी एंड पब्लिक फाइनेंस, पटना में एसोसिएट प्रोफेसर एवं अर्थशास्त्री डॉ सुधांशु कुमार ने इस बारे में बताया कि जब भी युद्ध अथवा महामारी जैसी स्थिति होती है तो अचानक से गरीबी बढ़ती है। कुछ अमीर लोगों ने आपदा को अवसर बनाकर मुनाफा कमाया, दूसरी ओर लाखों लोगों की आजीविका छिन गई। यहां चिंता की सबसे बड़ी बात यह है कि आबादी का बड़ा हिस्सा दो डॉलर भी नहीं कमा पा रहा है। लोगों की क्रयशक्ति समाप्त हो गई है। इसे किसी भी तरह जिंदा करने की जरूरत है। सरकार को इस दिशा में प्रयास करने की जरूरत है कि कैसे भी करके सामाजिक पिरामिड के निचले हिस्से पर स्थित आबादी के हाथों में पैसा पहुंचे। आर्थिक असमानता इस तरह बढ़ेगी तो अस्थिरता के जोखिम भी उत्पन्न होंगे। सरकार ने महामारी के दौरान नीतिगत स्तर पर समर्थन करने का प्रयास तो किया, लेकिन मध्यम वर्ग को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया गया। मध्यम वर्ग के एक तिहाई हिस्सा के गरीब हो जाने के पीछे यह कमी भी जिम्मेदार है।