‘1952 में जो हो रहा था, आज भी कुछ ऐसा ही…’ दवाइयों की कालाबाजारी पर छलका धर्मेंद्र का दर्द, शेयर किया दिलीप कुमार की फिल्म का वीडियो

कोरोना काल में दवाइयों की कालाबाजारी को लेकर बॉलीवुड एक्टर धर्मेंद्र ने अपना गुस्सा जाहिर किया है। इसी के साथ उन्होंने दिलीप कुमार की फिल्म ‘फुटपाथ’ का एक वीडियो क्लिप शेयर किया है।

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देश में कोरोनावायरस लगातार अपने पैर पसार है। हर दिन लाखों लोग इस खतरनाक वायरस की चपेट में आ रहे हैं। तो वहीं, सैकड़ों लोगों की मौत हो रही है। हालांकि, इतनी विकट स्थिति होने के बाद भी कुछ लोग आपदा में अवसर तलाश रहे हैं। देश में बड़े स्तर पर रेमडेसिविर, ऑक्सीजन सिलेंडर समेत सभी जरूरी दवाइयों की कालाबाजारी हो रही है।

आपदा के इस समय में जरूरी सामानों की कालाबाजारी को लेकर बॉलीवुड एक्टर धर्मेंद्र ने अपना गुस्सा जाहिर किया है। दरअसल, धर्मेंद्र ने अपने ट्विटर हैंडल से दिलीप कुमार की फिल्म की एक क्लिप शेयर की है। यह वीडियो दिलीप कुमार की फिल्म ‘फुटपाथ’ का है। इस क्लिप में दिलीप कुमार कह रहे हैं, “जब शहर में बीमारी फैली, तो हमने दवाइयां छुपा दीं और उनके दाम बढ़ा दिए। जब हमें मालूम हुआ कि पुलिस हम पर छापा मारने वाली है, तो हमने वहीं दवाइयां गंदे नाले में फिकवा दीं।”

इस क्लिप में दिलीप कुमार आगे कह रहे हैं, “मगर आदमी की अमानत को आदमी के काम नहीं आने दिया। मुझे अपने बदन से सड़ी हुई लाशों की बू आती है। अपने हर सांस में मुझे दम तोड़ रहे बच्चों की सिसकियां सुनाई देती हैं। हम जैसे जलील कुत्तों के लिए आपके कानून में कोई मुनासिब सजा नहीं होगी। हम इस धरती पर सांस लेने के लायक नहीं। हम इंसान कहलाने की लायक नहीं हैं, इंसानों में रहने के लायक नहीं हैं।

वीडियो में दिलीप कुमार आगे कह रहे हैं, “हमारे गले घोंट दो और हमें दहकती हुई आगों में जलाओ। हमारी बदबूदार लाशों को गलियों में फिकवा दो। ताकि वो गरीब और वो मजबूर लोग, जिनका हमने अधिकार छीना है। जिनके घरों पर हम तबाही लाए हैं, वो हमारी लाशों पर थूकें।”

दिलीप कुमार के इस वीडियो को शेयर करते हुए धर्मेंद्र ने लिखा, “1952 में जो हो रहा था… आज भी कुछ ऐसा ही हो रहा है। फुटपाथ फिल्म में दिलीप साहब।” बॉलीवुड के हीमैन धर्मेंद्र द्वारा शेयर किए गए इस वीडियो पर फैन्स खूब कमेंट कर रहे हैं और अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। बता दें, धर्मेंद्र सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहते हैं। वह अक्सर समसामयिक मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखते नजर आ जाते हैं।