1962 में जिस पार्टी ने सैनिकों को खून नहीं दिया उससे गठबंधन कर रही राहुल गांधी की पार्टी- RSS समर्थक अवनीजेश अवस्थी का आरोप

पैनलिस्ट ने कहा कि 1962 में जिस वामपंथी पार्टी ने भारतीय फौज को खून देने से मना किया था। उनके साथ राहुल गांधी गठबंधन कर रहे हैं।

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रिपब्लिक भारत पर डिबेट के दौरान RSS समर्थक अवनीजेश अवस्थी ने कहा कि पिछले 90 वर्षों से लगातार संघ पर इस तरह का कीचड़ उछाला जा रहा है। गालियां दी जा रही हैं। लेकिन एक पुरानी कहावत है कि चांद पर थूकने से वह चाद के ऊपर नहीं थूकने वाले के ऊपर जाता है। उसी तरह संघ आरोपों का जवाब नहीं देता, सवालों का जवाब देता है। जब भी जिसको जितने सवाल करने हो कर सकता है और उनके जवाब जान सकता है। पैनलिस्ट ने कहा कि 1962 में जिस वामपंथी पार्टी ने भारतीय फौज को खून देने से मना किया था। चीन के लिए रसद इकट्ठा की थी। उनके साथ राहुल गांधी गठबंधन कर रहे हैं।

वहीं, आज तक पर डिबेट के दौरान बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि राहुल गांधी की तकलीफ क्या है मैं आपको आज सपाट समझा देता हूं। राहुल गांधी जान चुके हैं कि वे एक असफल राजनेता हैं। कहीं न कहीं वे ढूंढ रहे हैं कि किसके माथे पर ठीकरा फोड़ा जाए। 2014 के बाद से वे लगातार ठीकरा फोड़ ही रहे हैं। कभी ईवीएम खराब, कभी चुनाव आयोग खराब, सुप्रीम कोर्ट खराब, सेना खराब, अब तो इंदिरा गांधी भी खराब हैं। अब तो इमरजेंसी का ठीकरा भी इंदिरा गांधी के सिर पर फोड़ दिया है। राहुल गांधी ढूंढ रहे हैं कि किसकी गर्दन को हलाल किया जाए।

पात्रा ने कहा कि ये सुबह से मोदी को गाली देना चालू करते हैं। सुबह-शाम मोदी को गाली देने का काम करते हैं। फिर कहते हैं कि देश में इमरजेंसी है।

इससे पहले राहुल गांधी ने कहा था कि संस्थाएं आपातकाल के समय कमजोर नहीं हुई थीं जैसे कि आज आरएसएस द्वारा किया जा रहा है। राहुल गांधी ने कहा कि जिस तरीके से मक्का पर वहाबियों का कब्जा है उसी तरह देश की संस्थाओं पर आरएसएस का कब्जा है।

मालूम हो कि आज बीजेपी ने आपातकाल पर राहुल गांधी की टिप्पणियों को मजाक करार दिया। मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि कांग्रेस नेता को आरएसएस को समझने में लंबा समय लगेगा। जावड़ेकर ने कहा कि उनकी टिप्पणियां हंसी के योग्य हैं। उस समय, सरकार ने सभी संगठनों को प्रभावित किया था।

मंत्री ने कहा कि सांसदों और विधायकों को गिरफ्तार कर लिया गया था। लगभग सभी दलों पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। समाचार पत्र भी बंद कर दिए गए थे।