21 साल पहले हुई थी गलती, बच्चे थे ईशा और आकाश, अब अंबानी परिवार को भरना पड़ेगा बड़ा जुर्माना

सेबी ने अपने 85 पृष्ठ के आदेश में कहा कि आरआईएल के प्रवर्तकों और पीएसी (मिली-भगत से काम करने वाले लोग) साल 2000 में कंपनी में 5 प्रतिशत से अधिक के अधिग्रहण के बारे में खुलासा करने में विफल रहे। मुकेश और अनिल कारोबार का बंटवारा कर 2005 में अलग हो गए थे।

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भारतीय प्रतिभूति एवं नियामक बोर्ड (सेबी) ने बुधवार को रिलायंस इंडस्ट्रीज के मौजूदा और पूर्व प्रमोटरों पर 25 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। यह जुर्माना साल 2000 में रिलायंस इंडस्ट्रीज से जुड़े मामले में अधिग्रहण नियमों का अनुपालन नहीं करने को लेकर लगाया गया है।

उद्योगपतियों मुकेश अंबानी और उनके भाई अनिल अंबानी के अलावा सेबी ने नीता अंबानी, टीना अंबानी, के डी अंबानी और परिवार के अन्य सदस्यों पर जुर्माना लगाया गया है। जनवरी 2000 में रिलायंस इंडस्ट्रीज ने 38 इकाइयों को 12 करोड़ रुपये के इक्विटी शेयर जारी किए थे। यह आवंटन साल 1994 में जारी एनसीडी के एवज में मिले वॉरंट के आधार पर किया गया था।

सेबी ने अपने 85 पृष्ठ के आदेश में कहा कि आरआईएल के प्रवर्तकों और पीएसी (मिली-भगत से काम करने वाले लोग) साल 2000 में कंपनी में 5 प्रतिशत से अधिक के अधिग्रहण के बारे में खुलासा करने में विफल रहे। मुकेश और अनिल कारोबार का बंटवारा कर 2005 में अलग हो गए थे।

नियामक ने पाया कि संबंधित 6.83 फीसदी हिस्सेदारी साल 2000 में रिलायंस इंडस्ट्रीज के प्रमोटर्स द्वारा खरीदी गई थी। इसके लिए सभी व्यक्तियों से एकमत से यह अधिग्रहण किया था। इससे अधिग्रहण की 5 फीसदी से अधिकतम सीमा का उल्लंघन था।

दरअसल नियमों के मुताबिक, प्रवर्तक अगर कंपनी में एक वित्त वर्ष में पांच फीसदी से ज्यादा हिस्सेदारी बढ़ाता है तो उसे अल्प शेयर धारकों के लिए ओपन ऑफर लाना होता है, जो रिलायंस ने नहीं लाया था। आदेश के इस मामले में उन्हें सात जनवरी, 2000 को शेयर अधिग्रहण की सार्वजनिक तौर पर घोषणा करने की जरूरत थी। पीएसी को 1994 में जारी वारंट के आधार पर इसी तारीख को आरआईएल के इक्विटी शेयर आबंटित किए गए थे।