3600 से ज्यादा गांवों के नाम ‘राम’ के नाम पर, कृष्ण पर 3309 गांव, इंदिरा गांधी पर 36 तो लाल बहादुर शास्त्री के नाम पर एक भी नहीं..

इंडियन एक्सप्रेस ने वरिष्ठ पत्रकार श्यामलाल ने 2011 की जनगणना में 6 लाख 77 हजार से भी ज्यादा गांवों की लिस्ट का अध्ययन कर यह पाया कि हर गांव के नाम के पीछे एक कहानी होती है।

Village Name भगवान से लेकर महान विभूतियों तक के नामों पर रखे गए हैं गांवों के नाम । Photo Source- Indian Express

भारत के ग्रामीण इलाकों में गांवों के नाम रखने में सबसे ज्यादा वरीयता देवी-देवताओं के नामों को दी जाती थी। भगवान के नाम के बाद गांव के नाम रखने में पौराणिक कथाओं से लेकर महान विभूतियों तक के नामों का इस्तेमाल किया जाता रहा है। इतना ही नहीं, कई गांवों के नाम तो फिल्मों से भी प्रभावित मिलते हैं। यह जानकारी साल 2011 में हुई जनगणना में सामने आई थी। इंडियन एक्सप्रेस ने 2011 की जनगणना में 6 लाख 77 हजार से भी ज्यादा गांवों की लिस्ट का अध्ययन कर यह पाया था कि केरल छोड़कर देश के लगभग सभी राज्यों में भगवान राम और कृष्ण के नाम पर एक गांव जरूर है। लिस्ट के अनुसार देश में साल 2011 तक राम के नाम पर 3,626 गांव थे तो कृष्ण के नाम पर 3,309 गांव थे। इसी तरह गणेश के नाम 446 और गुरुनानक साहेब के नाम पर 35 गांव हैं।

राज्यों और शहरों के नाम पर गांव: देश में बंगाल के नाम पर 92 गांव हैं, मजे की बात ये है कि इनमें से एक भी गांव पश्चिम बंगाल में नहीं है बल्कि महाराष्ट्र, पंजाब और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में है। इसी तरह 33 गांवों के नाम केरल राज्य पर हैं, सभी गांव देश के उत्तरी भाग में स्थित हैं। इसके अलावा देश में 17 प्रयाग (इलाहाबाद का नया नाम), 41 काशी (वाराणसी का पुराना नाम) और 28 आगरा (ज्यादातर आगरा मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल और असम में) हैं। जबकि 189 गांवों के नाम बिहार से शुरू होते हैं, जिनमें से 171 बिहार राज्य से बाहर हैं। ढाका (बांग्लादेश की राजधानी) नाम के 28 गांव हैं और नेपाल के नाम पर 40 गांव हैं।

नाम में धाम: उत्तराखंड के पौराणिक स्थलों के नाम पर भी कई गांवों के नाम हैं या फिर ऐसे नाम रखे गए हैं जब इनका नाम पुकारा जाए तो धाम का नाम भी जुबान पर आ जाए। 47 गांवों के नाम बद्री से शुरू होते हैं। 75 गांव ऐसे हैं जिनके नाम पर केदार शामिल हैं। इनमें से अधिकतर गांव उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश और बिहार में स्थित हैं।

रामायण के पात्रों के नाम पर गांवों के नाम: रामायण के पात्रों के नामों पर गांवों के नाम रखने का प्रचलन भी तेज रहा है। नामों के मामले में भरत लक्ष्मण से आगे मालूम पड़ते हैं। साल 2011 की जनगणना के अनुसार देश में 187 गांव ऐसे हैं जो भरत के नाम पर हैं, इसके बाद लक्ष्मण के नाम पर 160 गांव हैं। 75 गांव सीता के नाम पर हैं तो हनुमान के नाम पर 367 गांव हैं। वहीं देश में 6 गांव ऐसे भी हैं, जिनका नाम रावण पर है। इसके अलावा तीन गांवों के नाम रावण के पिता अहिरावण (सभी बिहार में) के नाम पर है। रावण के भाई विभीषण के नाम पर कोई गांव नहीं है। कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में कुछ गांवों के नाम अयोध्या देखे गए हैं।

महाभारत के किरदार: अगर महाभारत के किरदारों की बात की जाए तो गांवों के नाम रखने में कृष्ण लोगों का सबसे पसंदीदा नाम है। देश में कुरुक्षेत्र के नाम पर कोई गांव नहीं है। सत्य के प्रतीक माने जाने वाले युधिष्ठिर के नाम पर केवल दो गांव हैं। जबकि भीम के नाम 385 गांव और अर्जुन के नाम 259 गांव हैं। देश में सिर्फ एक गांव है, जिसका नाम भीष्म पितामह के नाम है, यह गांव उड़ीसा के गंजम जिले में आता है। वहीं धृतराष्ट्र के नाम पर 8 और कंस के नाम 42 गांव हैं।

आधुनिक भारत के नेता भी लोगों की पसंद: आधुनिक भारत के नेताओं के नाम को भी गांवों के नाम में वरीयता दी जाती है। 2011 की जनगणना के अनुसार देश में 117 गांव महात्मा गांधी के नाम पर हैं, इसके अलावा जवाहरलाल नेहरू के नाम पर 72 गांवों के नाम हैं। हैरान करने वाली बात ये है कि ‘जय जवान, जय किसान का नारा’ देने वाले लाल बहादुर शास्त्री के नाम पर 2011 तक एक भी गांव नहीं था। जबकि इंदिरा गांधी के नाम पर 36, राजीव गांधी के नाम 19 और बी आर अंबेडकर के नाम पर 13 गांव हैं। वहीं सुभाष चंद्र बोस के नाम पर 27 गांवों के नाम रखे गए हैं।

मुगल कालीन शासकों के नाम पर गांवों के नाम: मुगल शासकों के नाम पर भी कई गांवों के नाम हैं। इस लिस्ट में सबसे मुगल शासक अकबर हैं। जिनके नाम पर 234 गांव हैं। इसके बाद बाबर का नाम आता है, जिनके नाम पर 62 गांवों का नाम रखा गया है। वहीं हुमायूं के नाम पर 30 गांव हैं। इसके अलावा शाहजहां के नाम 51 गांव तथा औरंगजेब के नाम पर 8 गांव (सभी यूपी के बिजनौर जिले में) हैं।

फिल्मों से प्रभावित नाम: देश में कई गांवों के नाम फिल्मों पर भी रखे गए हैं। सूची के अनुसार मशहूर फिल्म शोले के रामगढ़ की तर्ज पर 163 गांवों के नाम रखे गए हैं, वहीं आमिर खान द्वारा निर्मित पीपली लाइव फिल्म के नाम पर 27 गांवों का नाम पीपली रखा गया है।

नामों का भी अध्ययन किया जाता है, इसके जरिए किसी भी देश के इतिहास, उसकी संस्कृति और प्रकृति के बारे में जानकारी जुटाई जा सकती है। भारत में इसकी काफी कमी है। जानकारी के लिए बता दें कि नामों के अध्ययन को ओनोमैस्टिक्स कहा जाता है, वहीं जगहों के नामों के रिसर्च को टोपोनिमी कहा जाता है।

उड़ीसा कैडर के पूर्व आईएएस अधिकारी, आर बालकृष्णन पिछले कई सालों से नामों के इस तरह के रिसर्च से जुड़े हुए हैं। उन्होंने इस तरह के कई रिसर्च पेपर भी जारी किए हैं, दुनिया की कई जगहों पर इस विषय पर लेक्चर भी दिए हैं। उनका मानना है कि अगर सही तरीके से नामों का अध्ययन किया जाए तो भारतीय इतिहास के कई पन्नों को खोला जा सकता है।

बालकृष्णन के अनुसार किसी भी जगह का नाम उसके पुराने इतिहास के जीवाश्म की तरह होता है। इसके जरिए यहां रहने वाले लोगों के बारे में काफी जानकारी जुटाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि ऐसा देखा गया है कि प्रवासी नई जगहों पर जाकर उस पुरानी जगहों के नाम का इस्तेमाल करते हैं, जहां से वह आए हैं। ऐसे में अगर एक जैसे नाम की जगहों का तुलनात्मक अध्ययन किया जाए तो पता चल सकता है कि एक जगह से दूसरी जगह कितने लोग गए होंगे।

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