5 राज्यों में हारने, बंगाल में डबल जीरो आने के बाद वो हैं हैप्पी, राहुल के ट्वीट पर बोले शिवराज के मंत्री- खुश रहना है तो कांग्रेसी नेता से सीखें

शिवराज सरकार में गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने बंगाल चुनाव नतीजों पर कहा कि चूक कहीं नहीं हुई बल्कि हमने बीजेपी को 3 सीटों से 78 सीटों पर पहुंचा दिया।

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शिवराज सरकार में गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने बंगाल चुनाव नतीजों पर कहा कि चूक कहीं नहीं हुई बल्कि हमने बीजेपी को 3 सीटों से 78 सीटों पर पहुंचा दिया। वोट प्रतिशत में भी 38 फीसदी की वृद्धि हुई है। बस ममता बनर्जी का ड्रामा काम कर गया जो उन्होंने व्हीलचेयर पर बैठकर किया था। मंत्री ने कहा कि आखिरी चरण में कोरोना के चलते कई चुनावी सभाएं रद्द होने से बीजेपी को खासा नुकसान हुआ।

नरोत्तम मिश्रा ने 200 पार के नारे पर कहा कि चुनावी नारा हमेशा बड़ा दिया जाता है। राहुल गांधी पर तंज कसते हुए मिश्रा ने कहा कि बंगाल में कांग्रेस की कोई सीट नहीं है। फिर भी राहुल गांधी खुश हैं। कोरोना के समय में भी कोई खुश रहना चाहता है तो राहुल गांधी से सीखे।

बता दें कि रविवार को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे आते ही ममता बनर्जी अपने पैरों पर चलती दिखीं। दरअसल पूरे चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने व्हीलचेयर पर बैठकर प्रचार किया था। ममता बनर्जी ने रविवार को बंगाल में जीत हासिल की लेकिन वे नंदीग्राम में अपना चुनाव हार गईं। जहां उनके पूर्व सहयोगी-भाजपा उम्मीदवार सुवेंदु अधिकारी ने कई राउंड की मतगणना के बाद बहुत कम वोटों के अंतर से उन्हें हरा दिया।

दो बार की मुख्यमंत्री ने अपने लिए तीसरा कार्यकाल जीता है लेकिन क्या उनके नंदीग्राम हारने का मतलब है कि वह मुख्यमंत्री नहीं बन सकती हैं? हालांकि वह संविधान के तहत सीएम बन सकती हैं। ऐसे कई मुख्यमंत्री हैं जो अपने राज्यों में विधानसभाओं का हिस्सा नहीं हैं। बिहार के नीतीश कुमार ने तीन दशक से अधिक समय से चुनाव नहीं लड़ा है और बीते साल नवंबर में हुए चुनाव में भी वे चुनावी दौड़ में नहीं थे। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने भी चुनाव नहीं लड़ा।

दोनों अपने राज्य विधान परिषदों के सदस्य हैं – बिहार और महाराष्ट्र विधानसभाओं के दो सदन हैं। लेकिन बंगाल में ऐसा नहीं है। ममता बनर्जी को छह महीने के भीतर विधानसभा का सदस्य बनना होगा। वह खाली बची किसी भी सीट पर उपचुनाव लड़ सकती हैं या जहां किसी कारणवश चुनाव नहीं हो सके वहां से जीत हासिल कर सदन की सदस्यता ले सकती हैं।

संविधान के अनुच्छेद 164 में कहा गया है कि एक मंत्री जो छह महीने के भीतर विधायक नहीं है उसे इस्तीफा देना होगा। नंदीग्राम में आधिकारिक परिणामों से बहुत पहले, ममता बनर्जी ने कहा कि लोगों ने जो फैसला किया है, उन्हें स्वीकार है।

ममता बनर्जी ने कहा, “नंदीग्राम के बारे में चिंता न करें, मैंने नंदीग्राम के लिए संघर्ष किया क्योंकि मैंने एक आंदोलन किया था। यह ठीक है। नंदीग्राम के लोग जो भी फैसला चाहते हैं, मैं उसे स्वीकार करती हूं। मुझे कोई आपत्ति नहीं है। हमने राज्य जीत लिया है।”

ममता बनर्जी ने कहा, ‘जो भी हुआ सब अच्छे के लिए हुआ है। मुझे अब नियमित रूप से उस स्थान पर नहीं जाना पड़ेगा, मैं उस तरह से बच गयी हूं। लेकिन मैं अदालत में जाऊंगी। ” बता दें कि चुनाव आयोग ने तृणमूल कांग्रेस पार्टी द्वारा नंदीग्राम में दोबारा मतगणना करने की मांग को खारिज कर दिया है।