7.59 तोला सोना लेकर बैंक ने किसान को दिया 1.06 लाख का लोन, नहीं चुका पाया तो किया 3.65 लाख में नीलाम- कृषि विशेषज्ञ ने पूछा- कॉरपोरेट्स पर ऐसी सख़्ती क्यों नहीं?

2015 में बठिंडा के दौलतपुरा गांव के किसान देवेंद्र सिंह ने रामपुर फूल के ही एक निजी बैंक से 1.06 लाख रुपए का लोन लिया था। इसके लिए बैंक ने 7.59 तोला सोना गिरवी रखवाया था।

तस्वीर का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है। (एक्सप्रेस फोटो)

पंजाब में एक बैंक ने एक किसान से 7.59 तोला सोना लेकर उसे 1.06 लाख रुपए का लोन दिया। जब किसान लोन चुकाने में नाकाम रहा तो बैंक ने किसान के गिरवी रखे सोने में से 3.65 लाख रुपए का सोना नीलाम कर दिया। किसान के गिरवी रखे सोने को नीलाम करने पर कृषि विशेषज्ञ ने सवाल पूछते हुए कहा कि कॉरपोरेट्स पर ऐसी सख्ती क्यों नहीं की जाती है।

दरअसल यह मामला पंजाब के बठिंडा के रामपुर फूल का है। 2015 में बठिंडा के दौलतपुरा गांव के किसान देवेंद्र सिंह ने रामपुर फूल के ही एक निजी बैंक से 1.06 लाख रुपए का लोन लिया था। इसके लिए बैंक ने 7.59 तोला सोना गिरवी रखवाया था। करीब एक साल बाद 2016 में निजी बैंक ने लोन नहीं चुका पाने के कारण देवेंद्र सिंह के 3.65 लाख का सोना बेच दिया। जबकि देवेंद्र सिंह का कुल बकाया सिर्फ 1.25 लाख रुपए ही था। 

किसान देवेंद्र सिंह ने जब इसकी शिकायत भारतीय किसान यूनियन के नेताओं से की तो किसान नेताओं ने बैंक के बाहर धरना लगा दिया। प्रदर्शनकारी किसान बैंक से 2.40 लाख रुपए किसान को लौटाने की मांग करने लगे। किसान कई दिनों तक बैंक के बाहर धरना देते रहे बाद में पुलिस के आश्वासन पर उन्होंने धरना ख़त्म कर दिया। लेकिन प्रदर्शनकारी किसानों ने कहा है कि अगर इस मामले में 5 सितंबर तक कार्रवाई नहीं की जाती है तो दोबारा से धरना लगाया जाएगा। 

इस मामले पर कृषि विशेषज्ञ देवेंद्र शर्मा ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी। देवेंद्र शर्मा ने ट्वीट करते लिखा कि पंजाब में एक किसान को 1.06 लाख रुपए के लिए लोन के लिए 7.59 तोला सोना बैंक में गिरवी रखना पड़ा। लोन नहीं चुकाने पर बैंक ने उसके 3.65 लाख रुपए के मूल्य का सोना बेच दिया जबकि किसान का कुल बकाया 1.25 लाख रुपए ही था। आश्चर्य है कि कॉरपोरेट्स के मामले में ऐसी सख्ती और तेजी क्यों नहीं दिखाई जाती है।

देवेंद्र शर्मा के इस ट्वीट पर कई लोगों की प्रतिक्रिया भी देखने को मिली। @anu141 ने लिखा कि बैंकों और बैंकर मंत्री के अनुसार कॉरपोरेट्स देश की अर्थव्यवस्था का ध्यान रखते हैं जबकि वे किसान को अर्थव्यवस्था पर बोझ मानते हैं। @vikrant99v ने लिखा कि किसान चुनाव के लिए पैसा नहीं देते। कॉरपोरेट्स चुनाव के लिए पैसा देते हैं और वे आम आदमी की कीमत पर सिस्टम से पैसा लूटकर विलासितापूर्ण जीवन जीते हैं।