Afghanistan Crisis: तालिबान के कब्‍जे से अफगानिस्‍तान पर भुखमरी और बीमारियों का खतरा- WHO

नई दिल्‍ली. तालिबान (Taliban) ने पूरे अफगानिस्‍तान (Afghanistan) पर कब्‍जा कर लिया है. इसके साथ ही वहां अफरातफरी का माहौल है. हर कोई देश छोड़कर तालिबान से दूर भागना चाहता है. इस बीच अफगानिस्‍तान में तालिबान के कब्‍जे के बाद से मानवता पर भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं. देश में स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं की भी बुरी स्थिति है. इसे देखते हुए विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन (WHO) ने शनिवार को अफगानिस्‍तान में स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं को लेकर चेतावनी जारी की है. देश में इस समय जंग और हिंसा के कारण बड़ी संख्‍या में लोग भुखमरी व बीमारियों का शिकार हैं.

डब्‍ल्‍यूएचओ ने अनुमान लगाया है कि अफगानिस्‍तान की करीब आधी जनसंख्‍या, जिसमें 40 लाख महिलाएं और 1 करोड़ बच्‍चे शामिल हैं, को मानवीय मदद की तत्‍काल जरूरत है. रिपोर्ट के मुताबिक संयुक्त राष्ट्र की इस एजेंसी के प्रवक्ता तारिक जसारेविक ने एक बयान में कहा है कि अफगानिस्तान में मौजूदा सूखे से पहले से ही विकट स्थिति और बिगड़ने की आशंका है. डब्ल्यूएचओ के प्रवक्ता ने कहा, ‘महिला स्वास्थ्यकर्मियों तक महिलाओं की पहुंच सुनिश्चित करने पर ध्यान देने के साथ ही देश भर में बिना किसी रुकावट के स्वास्थ्य सेवाओं को लगातार जारी रखना चाहिए.’

उन्‍होंने कहा, ‘अधिकांश प्रमुख स्वास्थ्य सुविधाएं लोगों के लिए चल रही हैं. यह प्रांतीय स्तर की क्षेत्र निगरानी के आधार पर हो रहा है. स्वास्थ्यकर्मियों को महिला स्वास्थ्य कर्मचारियों सहित अपने-अपने पोस्‍ट पर लौटने या रहने के लिए बुलाया गया है.’

ब्रिटेन ने इस बीच कहा है कि वह तालिबान से भागकर देश में आने वाले अफगान शरणार्थियों को कोरोना वायरस संक्रमण की वैक्‍सीन लगाएगा. इंग्लैंड, स्कॉटलैंड और वेल्स भी आने वाले अफगानों को घर और अन्‍य सहायता प्रदान करने के लिए आपातकालीन फंड का उपयोग कर रहे हैं.

रिपोर्ट में कहा गया है कि अब तक ब्रिटेन ने इस क्षेत्र में मानवीय सहायता की अपनी धनराशि को दोगुना करने का फैसला किया है. देश नए पुनर्वास कार्यक्रम के तहत लगभग 20,000 कमजोर अफगानों को फिर से बसाना चाहता है.

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