BKU के राकेश टिकैत से जब जा भिड़ा आढ़ती! हुई तीखी नोक-झोंक; जानें- क्या है पूरा माजरा?

सोलन के पुलिस अधीक्षक वीरेंद्र शर्मा ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि किसी भी व्यक्ति के खिलाफ अभी कोई कार्रवाई नहीं गई क्योंकि पुलिस को कोई शिकायत नहीं मिली है।

Rakesh Tikait, BKU, National News किसान नेता और BKU प्रवक्ता राकेश टिकैत। (एक्सप्रेस आर्काइव फोटो)

हिमाचल प्रदेश के सोलन में सेब के दामों में गिरावट को लेकर किसानों द्वारा सड़क जाम का विरोध कर रहे एक स्थानीय आढ़ती की भारतीय किसान संघ (बीकेयू) के नेता राकेश टिकैत से तीखी नोक-झोंक हुई। इस नोक-झोंक की एक वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हो गई है। इससे पहले कि नोकझोंक और बढ़ती, वहां मौजूद पुलिसकर्मियों ने स्थिति पर काबू पा लिया।

आढ़ती (कमीशन एजेंट) ने बाद में मीडिया को बताया कि किसानों द्वारा सड़क जाम करने से उनका काम प्रभावित हुआ है। उसने कहा, ”अगर वे आंदोलन करना चाहते हैं, तो किसी दूसरी जगह पर ऐसा कर सकते हैं।” बाद में शिमला में मीडियाकर्मियों को संबोधित करते हुए टिकैत ने आरोप लगाया कि वह व्यक्ति नशे में था और उसके हाथों में पत्थर थे। उसने उनके वाहनों को नुकसान पहुंचाने की धमकी दी।

सोलन के पुलिस अधीक्षक वीरेंद्र शर्मा ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि किसी भी व्यक्ति के खिलाफ अभी कोई कार्रवाई नहीं गई क्योंकि पुलिस को कोई शिकायत नहीं मिली है। शिमला में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए टिकैत ने हिमाचल प्रदेश के किसानों से अपने सेब और अन्य फसलों की पर्याप्त कीमत सुनिश्चित करने के लिए एकजुट होने का आग्रह किया।

बीकेयू नेता ने कहा कि अगर वे एकजुट नहीं हुए तो बड़ी निजी कंपनियां पहाड़ी राज्य में कोल्ड स्टोरेज खोलकर उनकी फसलों के दाम तय करने लगेंगी। टिकैत ने मांग की कि पहाड़ी राज्य के सेब उत्पादकों को अपनी उपज मंडियों तक ले जाने के लिए परिवहन सब्सिडी दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि मंडी संसदीय क्षेत्र और अर्की, फतेहपुर और जुब्बल-कोटखाई विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव की तारीखों की घोषणा होने पर राज्य के किसान इस संबंध में अपनी रणनीति तय करेंगे।

टिकैत ने कहा कि किसान पांच सितंबर को उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में राष्ट्रीय स्तर की रैली करेंगे। बीकेयू तीन विवादास्पद कृषि कानूनों का विरोध कर रहे संयुक्त किसान मोर्चे का हिस्सा है। बीकेयू नेता ने कहा कि केंद्र सरकार को उनके साथ बिना शर्त बातचीत शुरू करके गतिरोध को तोड़ना चाहिए।

‘कानून BJP के अरबपति मित्रों के फायदे के लिए’: इसी बीच, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा ने शनिवार को आरोप लगाया कि तीनों ‘‘काले कृषि कानून भाजपा के अरबपति मित्रों के फायदे’’ के लिए लाए गए हैं। उन्होंने हिमाचल प्रदेश में अडानी समूह द्वारा सेब के दाम घटाने से किसानों को परेशानी होने के दावे वाली एक खबर का हवाला देते हुए ट्वीट किया, ‘‘किसान काले कृषि कानूनों का विरोध क्यों कर रहे हैं? क्योंकि अगर किसानों की मेहनत से उगाई गई फसल के दाम व अन्य चीजें तय करने का अधिकार भाजपा के अरबपति मित्रों को दे दिया गया तो यही हाल होगा।’’

कांग्रेस महासचिव ने आरोप लगाया, ‘‘काले कृषि कानून भाजपा के अरबपति मित्रों के फायदे के लिए हैं।’’ प्रियंका ने एक अन्य ट्वीट में उत्तर प्रदेश में अपराध की घटनाओं को लेकर राज्य की भाजपा सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, ‘‘मुख्यमंत्री जी, आपके होर्डिंग्स, विज्ञापनों में तो सब “ठीक ठाक” बताया जाता है। लेकिन, आपके राज में अपराधियों को इतनी शक्ति क्यों मिली हुई है? क्यों महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं?’’