BSP नेताओं के सपा में शामिल होनें पर बिफरीं मायावती, कहा- केवल झूठी तसल्ली देने और भगदड़ बचाने की कोशिश, इससे होगा नुकसान

समाजवादी पार्टी (सपा) ने रविवार को बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कुछ नेताओं के अपने खेमे में शामिल होने का दावा किया जिस पर बसपा प्रमुख ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।

Akhilesh Yadav Mayawati सपा प्रमुख अखिलेश यादव और बसपा प्रमुख मायावती। (फोटोः फेसबुक)

समाजवादी पार्टी (सपा) ने रविवार को बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कुछ नेताओं के अपने खेमे में शामिल होने का दावा किया जिस पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए बसपा प्रमुख मायावती ने कहा कि दूसरी पार्टियों के ‘‘स्वार्थी, टिकटार्थी व निष्कासित लोगों’’ को सपा में शामिल कराने से इस पार्टी का कुनबा और जनाधार बढ़ने वाला नहीं है।

रविवार को सपा मुख्यालय से जारी बयान के अनुसार समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के नेतृत्व में आस्था जताते हुए आज पूर्व सांसद बसपा के राष्ट्रीय महासचिव वीर सिंह एडवोकेट (मुरादाबाद), पूर्व विधायक अजीम भाई (फिरोजाबाद) तथा भाजपा के युवा क्षेत्रीय मंत्री विनोद मिश्र (जौनपुर) ने समाजवादी पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली। बयान में कहा गया कि सपा अध्यक्ष ने इन सभी नेताओं का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई कि इससे समाजवादी पार्टी को मजबूती मिलेगी। इसमें कहा गया कि बसपा-भाजपा छोड़कर आए नेताओं ने 2022 में सपा को बहुमत से जिताने तथा अखिलेश यादव को मुख्यमंत्री बनाने का संकल्प लिया।

गौरतलब है कि बसपा के पुराने कार्यकर्ता वीर सिंह राज्यसभा के सदस्य रह चुके हैं। उत्तर प्रदेश में अगले वर्ष की शुरुआत में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दल-बदल का सिलसिला शुरू हो गया है। सपा में इन नेताओं के शामिल होने के कुछ घंटे बाद बसपा प्रमुख मायावती ने ट्वीट कर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की।

मायावती ने कहा ”दूसरी पार्टियों के स्वार्थी, टिकटार्थी व निष्कासित लोगों को सपा में शामिल कराने से इनकी पार्टी का कुनबा व जनाधार आदि बढ़ने वाला नहीं है। यह केवल खुद को झूठी तसल्ली देने व अपनी पार्टी से संभावित भगदड़ को रोकने की कोशिश के अलावा और कुछ नहीं, जनता यह सब खूब समझती है।”

बसपा अध्यक्ष ने सिलसिलेवार ट्वीट में कहा, ”अगर सपा दूसरी पार्टियों के ऐसे लोगों को पार्टी में लेगी तो निश्चय ही टिकट की लाइन में खड़े इनके बहुत लोग भी दूसरी पार्टियों में जाने की राह जरूर तलाशेंगे। इससे इनका कुनबा व पार्टी का जनाधार बढ़ने वाला नहीं, बल्कि हानि ही ज्यादा होगी, किन्तु कुछ अपनी आदत से मजबूर होते हैं।”