CBI ने दर्ज किए 30 केस तो और तेज हुई ममता सरकार और केंद्र के बीच ‘जंग’? शिवसेना, कांग्रेस ने भी खोला मोर्चा

कलकत्ता उच्च न्यायालय ने सीबीआई को अप्रैल-मई चुनाव के बाद बलात्कार, हत्या और महिलाओं के खिलाफ अपराधों के आरोपों की जांच करने का आदेश दिया।

Times Now, TV DEBATE, SUJATA PAUL, GAURAV BHATIA, ANCHOR RADHIKA, 2024 ELECTION पश्चिम बंगाल सीएम ममता बनर्जी, दूसरी तरफ PM नरेंद्र मोदी (फोटो सोर्स- इंडियन एक्सप्रेस)

बंगाल सरकार ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट से केंद्र और केंद्रीय जांच एजेंसियों द्वारा राज्य में मामले दर्ज करना जारी रखने और संघीय ढांचे का उल्लंघन करने का आरोप लगाते हुए मुकदमे की तत्काल सुनवाई की अपील की थी। वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ लूथरा ने संविधान के अनुच्छेद 131 का हवाला देते हुए मुकदमे की सुनवाई करने के लिए कोर्ट से कहा। अनुच्छेद 131 के तहत केंद्र और राज्य सरकार के बीच या दो राज्यों के बीच विवादों को सुनना सुप्रीम कोर्ट का अधिकार है।

बंगाल चुनाव के बाद की कथित हिंसा की सीबीआई जांच की अनुमति देने वाले कलकत्ता उच्च न्यायालय के आदेश को राज्य सरकार द्वारा चुनौती दिए जाने के एक दिन बाद बंगाल सरकार द्वारा तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया गया। बता दें कि कलकत्ता उच्च न्यायालय ने एजेंसी को अप्रैल-मई चुनाव के बाद बलात्कार, हत्या और महिलाओं के खिलाफ अपराधों के आरोपों की जांच करने का आदेश दिया था।

बंगाल सरकार ने अदालत में कहा, “राज्य द्वारा बंगाल में घटनाओं से संबंधित मामलों के पंजीकरण के लिए सीबीआई से आम सहमति वापस लेने के तीन साल बाद भी, एजेंसी ने मामला दर्ज करके शासन के संघीय ढांचे का उल्लंघन जारी रखा है।”

राज्य ने कहा, “कानून और व्यवस्था राज्यों के विशेष अधिकार क्षेत्र में आता है।” बंगाल सरकार ने बताया कि उसने 2018 में सामान्य सहमति यानी सीबीआई जैसी केंद्रीय एजेंसियों के लिए राज्य सरकार की अनुमति वापस ले ली थी।

बंगाल सरकार ने कहा, “बंगाल सरकार ने 2018 में सामान्य सहमति वापस ले ली। उसके बाद भी सीबीआई ने बंगाल में हुई घटनाओं से संबंधित 12 मामले दर्ज किए हैं।” राज्य ने इसे “अवैध और केंद्र और राज्य के बीच संवैधानिक रूप से वितरित शक्तियों का उल्लंघन” बताया।

बंगाल सरकार द्वारा सामान्य सहमति वापस लेने के दो साल बाद तक सीबीआई ने राज्य में कलकत्ता उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अलावा कोई भी मामला दर्ज नहीं किया। हालाँकि, पिछले साल सितंबर में दो मामले मार्च 2020 के कलकत्ता उच्च न्यायालय के आदेश के आधार पर दायर किए गए थे, जिसने सीबीआई को केंद्रीय कर्मचारियों के खिलाफ मामले दर्ज करने और जांच करने की अनुमति दी थी।

तब से ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड से जुड़े कथित बहु-करोड़ घोटाले सहित 12 मामले दर्ज किए गए हैं, जिसके आधार पर प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया। आम सहमति को लेकर केंद्र-राज्य में टकराव इसलिए भी है क्योंकि केंद्रीय एजेंसियां ​​कोयला घोटाला मामले में तृणमूल के लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी की जांच कर रही हैं।

अभिषेक बनर्जी और उनकी पत्नी रुजीरा को पूछताछ के लिए दिल्ली में पेश होने का निर्देश दिया गया है। रुजिरा बनर्जी कल पेश होने वाली थीं, लेकिन उनके छोटे बच्चों का हवाला देते हुए कोलकाता में पूछताछ के लिए कहा गया। बनर्जी और उनकी पत्नी ने सभी आरोपों से इनकार किया है। उस मामले में प्राथमिकी की वैधता निर्धारित करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय में एक अलग सुनवाई चल रही है।

गौरतलब है कि 2018 के बाद से कई विपक्षी शासित राज्यों पंजाब, झारखंड, केरल, महाराष्ट्र और राजस्थान ने आम सहमति वापस ले ली है। विपक्षियों का आरोप है कि केंद्र में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार राजनीतिक विरोधियों को परेशान करने के लिए एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है।

प्रधानमंत्री मोदी और उनकी सरकार की तीखी और सबसे मुखर आलोचकों में से एक ममता बनर्जी का कहना है कि राजनीतिक विरोधियों को दंडित करने के लिए केंद्र , सीबीआई और केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल कर रहा है।