Explainer: सरकारी खर्च पर शिंजो आबे के अंतिम संस्कार का क्यों हो रहा है विरोध, पूर्व पीएम से जुड़े चर्च के काले कारनामों को पढ़ें

हाइलाइट्स

शिंजो आबे के दादा और 1957 से 1960 तक पीएम रहे नोबुसुके किशी ने चर्च को बढ़ाया
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार चर्च ने हत्यारे की मां से लगभग 100 मिलियन येन का दान लिया था
जापान के तीस हजार शिकायतकर्ता हैं जिनके करीब 856 मिलियन डॉलर चर्च ने ठग लिए हैं

टोक्यो. पूर्व जापानी PM शिंजो आबे के राजकीय अंतिम संस्कार कार्यक्रम के बाद भी लोगों में मौजूदा सत्ता दल के खिलाफ गुस्सा बढ़ता ही जा रहा है. अंतिम संस्कार के दौरान भी कई लोग टोक्यो के निप्पॉन बुडोकन हॉल के बाहर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे. जापान के लोग शिंजो आबे की मौत के बाद उनके यूनीफिकेशन चर्च के साथ संबंधों के कारण खफा थे, जिस कारण वह सरकारी खर्चे पर आबे के अंतिम संस्कार का खुलकर विरोध कर रहे थे. आर्थिक दृष्टि से देखें तो जापान की फुमियो किशिदा सरकार ने शिंजो के अंतिम संस्कार पर लगभग 12 मिलियन अमेरिकी डॉलर (1.65 बिलियन येन) खर्च किये हैं. भारी भरकम खर्चे को देखने के बाद लोगों में विरोध के सुर और तेज हो गए हैं जिसका नुकसान मौजूदा PM को भुगतना पड़ रहा है.

वहीं शिंजो को गोली मारने वाले आरोपी तेत्सुया यामागामी ने पूछताछ में जांचकर्ताओं को बताया कि वह पूर्व PM की जगह पहले यूनिफिकेशन चर्च के नेता को गोली मारना चाहता था, लेकिन कोरोना के कारण वह ऐसा नहीं कर सका. यामागामी के अनुसार यूनिफिकेशन चर्च के कारण उसका परिवार कंगाल हो गया था.

क्या है यूनिफिकेशन चर्च
यह चर्च एक दक्षिण-कोरियाई धार्मिक संगठन है जो जापान में 41 वर्षों से काम कर रहा है. इस चर्च को आधिकारिक तौर पर फैमिली फेडरेशन फॉर वर्ल्ड पीस एंड रीयूनिफिकेशन के रूप में जाना जाता है और अपमानजनक भाषा में ‘द मूनीज’ कहा जाता है. 2012 से संस्थापक मायुंग मून की मृत्यु के बाद से चर्च का नेतृत्व कर रही हक जा हान मून और उनके पति ने जापान आना बंद कर दिया था. हमलावर के अनुसार हक जा हान मून को मारने का कोई मौका नहीं दिखने पर उसने यूनिफिकेशन चर्च के साथ सबसे अधिक सहानुभूति रखने वाले 67 वर्षीय शिंजो आबे को निशाने पर लेने की ठानी.

विशेषज्ञों का कहना है कि शीत युद्ध के दौरान चर्च के दक्षिणपंथी विश्वासों ने विदेशों में इसका विस्तार करने में मदद की. शिंजो आबे के दादा और 1957 से 1960 तक जापान के प्रधानमंत्री रहे नोबुसुके किशी चर्च के संस्थापक मायुंग मून के अच्छे दोस्त हुआ करते थे जिन्होंने जापान में इस संगठन को फैलने में मदद की. जापानी मीडिया के अनुसार, किशी ने ही 1968 में चर्च की राजनीतिक शाखा, इंटरनेशनल फेडरेशन फॉर विक्टरी ओवर कम्युनिज़्म इन जापान को स्थापित करने में मदद की थी. देश में पैर पसारने के बाद चर्च ने लोगों को आर्थिक रूप से कंगाल करना शुरू कर दिया. चर्च ने लोगों को अपने झांसे में फंसाकर करोड़ों डॉलर ऐंठ लिए. इस रूढ़िवादी धार्मिक संगठन को अक्सर कम्युनिस्ट विरोधी और सामूहिक शादियां कराने के लिए जाना जाता है.

हमलावर को भी चर्च ने लूटा
आबे के हत्यारे, यामागामी के मामले में, रिश्तेदारों का कहना है कि उसकी मां जो कि चर्च की एक धर्मनिष्ठ अनुयायी थीं उन्हें भी चर्च ने कंगाल बना दिया. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार चर्च ने हत्यारे की मां से लगभग 100 मिलियन येन ($692,000) का दान लिया था जिसका एक बड़ा हिस्सा उसके पिता की आत्महत्या के बाद मिली जीवन बीमा की राशि से आया था. दान ने परिवार को दिवालिया कर दिया और जिस कारण आरोपी का कॉलेज भी छूट गया.

856 मिलियन डॉलर ऐंठे
अलजज़ीरा की एक रिपोर्ट के मुताबिक जापान में चर्च की ठगी के पीड़ितों का प्रतिनिधित्व करने वाले वकीलों के एक समूह ने बताया कि उनके पास ऐसे तीस हजार शिकायतकर्ता हैं जिनके करीब 856 मिलियन डॉलर चर्च ने ठग लिए हैं. जानकारी के मुताबिक चर्च ने दुनिया भर में इस पैसे का इस्तेमाल कर अरबों डॉलर का व्यापारिक साम्राज्य खड़ा कर लिया है.

गोल्फ रिसॉर्ट, रक्षा कंपनी और आलीशान होटल का मालिक है चर्च
ब्रिटेन के फाइनेंशियल टाइम्स के अनुसार, मून ने 1963 में दक्षिण कोरिया में टोंगिल ग्रुप नामक एक समूह की स्थापना की थीं. साथ ही चर्च ने इन पैसों से स्की, गोल्फ रिसॉर्ट, एक रक्षा कंपनी, एक रसायन समूह, एक कार पार्ट्स बनाने वाली कंपनी खड़ी कर ली है. संयुक्त राज्य अमेरिका में भी चर्च के व्यापारिक साम्राज्य में वॉशिंगटन टाइम्स अखबार, न्यूयॉर्क में न्यू यॉर्कर होटल, ट्रू वर्ल्ड फूड्स सीफूड कंपनी और एक विशाल संपत्ति पोर्टफोलियो शामिल है.

शिंजो की पार्टी से संबंध
शिंजो की लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (एलडीपी) के साथ यूनीफिकेशन चर्च के संबंध ही पूर्व PM की हत्या की वजह बने हैं. उनकी मौत के बाद जब मीडिया के माध्यम से यह बात सबके सामने आई तो लोगों ने सरकारी खर्चे पर आबे के अंतिम संस्कार का विरोध करना शुरू कर दिया. मौत के बाद हुए चुनावों में LDP को मिली एकतरफा जीत के बाद हुए चर्च के साथ उनके संबंधों के खुलासे ने मौजूदा PM किशिदा को भी खासा नुकसान पहुंचाया है. किशिदा की अप्रूवल रेटिंग 63 प्रतिशत से गिरकर अब 29 प्रतिशत पर आ गई है. हालांकि अब सत्ता पर काबिज LDP ने यूनीफिकेशन चर्च से सभी संबंध तोड़कर लोगों से माफी मांग ली है.

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