J&K: गुलाम नबी आजाद के कार्यक्रम के पोस्टर में ‘G-23’ वाले चेहरे, पर सोनिया-राहुल गायब; कपिल सिब्बल बोले- हम कांग्रेस को कमजोर होता देख रहे

कार्यक्रम में कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने तो सीधे तौर पर पार्टी में चल रही गड़बड़ियों पर चर्चा के लिए ही सभी नेताओं के जुटने का खुलासा किया।

Ghulam Nabi Azad, Kapil Sibal

कांग्रेस में शीर्ष नेतृत्व और वरिष्ठ नेताओं के बीच उभरे मतभेद अब खुलकर सामने आने लगे है। पिछले साल चिट्ठी लिखकर कांग्रेस में हर स्तर पर बदलाव की मांग करने वाले करीब 23 पूर्व नेताओं में से कुछ आज जम्मू में एक कार्यक्रम में साथ इकट्ठा हुए। गुलाम नबी आजाद समेत कुछ नेताओं ने साफ तौर पर पार्टी में चल रहे घटनाक्रम पर गुस्सा जाहिर किया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सबसे चौंकाने वाली घटना यह थी कि कार्यक्रम में जो जी-23 नेताओं का पोस्टर लगाया गया, उसमें न तो कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और न ही राहुल गांधी का चेहरा शामिल किया गया।

नेताओं ने खुलकर कबूली कांग्रेस में समस्या की बात: कांग्रेस के इस कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश में पार्टी के अध्यक्ष रह चुके राज बब्बर, पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल और मनीष तिवारी शामिल हुए। इनमें सिब्बल ने तो सीधे तौर पर पार्टी में चल रही गड़बड़ियों पर चर्चा के लिए ही सभी नेताओं के जुटने का खुलासा किया। सिब्बल ने कहा, “सच्चाई तो यह है कि हम कांग्रेस पार्टी को कमजोर होता देख रहे हैं। इसलिए हम आज यहां इकट्ठा हुए हैं। हम पहले भी साथ जुटे हैं और हमने पार्टी को हमेशा मजबूत किया है।”

सिब्बल यहीं नहीं रुके। उन्होंने आगे कहा, “गुलाम नबी आजाद साहब की सही भूमिका क्या है? एक आदमी जो एयरक्राफ्ट उड़ाता है, वह अनुभवी होगा। एक इंजीनियर उसके साथ होता है, जो इंजन में किसी गड़बड़ी को ढूंढकर उसे ठीक करता है। गुलाम नबी जी एक इंजीनियर की तरह ही अनुभवी हैं।”

जी-23 का लक्ष्य कांग्रेस की मजबूती: इससे पहले राज बब्बर ने शीर्ष नेतृत्व से मतभेद रखने वाले नेताओं के समूह को जी-23 कहे जाने पर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा, “लोग कहते हैं जी-23। मैं कहता हूं गांधी-23। महात्मा गांधी जी के विश्वास, हिम्मत और सोच के साथ ही इस देश का कानून और संविधान बना था। कांग्रेस मजबूती के साथ इन्हें आगे ले जाने के लिए खड़ी है। जी-23 कांग्रेस को मजबूत करना चाहती है।”

इसके पहले गुलाम नबी आजाद ने कार्यक्रम में उनके साथ इकट्ठा हुए नेताओं की ओर इशारा करते हुए कहा कि पिछले 5-6 सालों मेरे सभी दोस्तों ने जम्मू-कश्मीर पर संसद में काफी बोला। फिर चाहे वह इसकी बेरोजगारी के बारे में, राज्य का दर्जा छीनने के बारे में, उद्योग को खत्म करने, शिक्षा और जीएसटी लागू करने के बारे में हो।