LGBT और फेमिनिज्म के गलत पक्ष को बढ़ावा देने पर टिक टॉक फंसा, रूस ने लगाया तगड़ा जुर्माना

हाइलाइट्स

रूस की अदालत ने टिक टॉक पर 51,000 डॉलर का जुर्माना लगाया है
टिक टॉक पर आरोप था कि कंपनी एलजीबीटी और नारीवाद के गलत पक्ष को दिखा रही है
स्ट्रीमिंग सेवा ट्विच यूक्रेन के युद्ध से संबंधित इंटरव्यू चलाने पर लगाया गया फाइन

मास्को. रूस ने मंगलवार को LGBT प्रोपेगेंडा फैलाने के आरोप में चीनी वीडियो स्ट्रीमिंग ऐप टिक टॉक (Tik Tok) पर भारी जुर्माना लगाया है. न्यूज़ एजेंसी रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक यह जुर्माना ‘एलजीबीटी प्रचार’ पर रूसी कानूनों का उल्लंघन करने वाली सामग्री को हटाने में विफल रहने पर लगाया गया है. मॉस्को की टैगांस्की डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने एक सुनवाई के दौरान पाया कि बीजिंग स्थित आईटी कंपनी बाइटडांस की सब्सिडरी टिक टॉक ने देश के कानूनों का उल्लंघन किया है. कोर्ट ने टिक टॉक पर 30 लाख रूबल (51,000 डॉलर) का जुर्माना थोपा है. न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार टिक टॉक पर आरोप था कि कंपनी अपने मंच पर गैर-पारंपरिक मूल्यों, एलजीबीटी, नारीवाद और पारंपरिक यौन मूल्यों के गलत पक्ष को बढ़ावा दे रही थी.

ट्विच पर यूक्रेन का समर्थन करने पर जुर्माना
स्ट्रीमिंग सेवा ट्विच को एक यूक्रेनी राजनीतिक व्यक्ति के साथ वीडियो साक्षात्कार करना भारी पड़ गया. रूस ने वीडियो इंटरव्यू को फेक बताते हुए कंपनी पर 4 मिलियन रूबल ($ 68,000) का जुर्माना लगाया गया है. अमेज़न के स्वामित्व वाली ट्विच पर यूक्रेनी राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की के सलाहकार ओलेक्सी एरेस्टोविच के साथ एक साक्षात्कार करने के आरोपों में सुनवाई चल रही थी. आपको बता दें कि इस साल की शुरुआत में ऐसे ही एक इंटरव्यू के लिए ट्विच पर 3 मिलियन रूबल का जुर्माना लगाया गया था.

सेना के खिलाफ प्रचार करने पर है 15 साल की कैद
यूक्रेन में रूसी सेना के स्पेशल मिलिट्री ऑपरेशन के शुरू होने के बाद रूस ने सशस्त्र बलों को बदनाम करने पर रोक लगाते हुए एक नया कानून पारित किया था. इस कानून के तहत सेना के खिलाफ दुष्प्रचार करने पर 15 साल तक की सजा का प्रावधान है. साथ ही विदेशी टेक फर्मों को इस कानून का उल्लंघन करने के खिलाफ भी सख्त चेतावनी दी गई है.

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