NSA, टाडा आरोपी रह चुके हैं नवजोत सिंह सिद्धू के सलाहकार, जानिए कौन हैं कश्मीर को अलग देश बताने वाले और तालिबान का समर्थन करने वाले मलविंदर सिंह माली

संगरूर जिले के भवानीगढ़ के पास सकरौदी गांव के रहने वाले माली ने पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला से पत्रकारिता की पढ़ाई की और कई पंजाबी अखबारों में काम किया।

Navjot Singh Sidhu, Punjab, Congress,Malvinder Singh Mali, Amarinder Singh विवादों में सिद्धू के एडवाइजर मालविंदर सिंह माली (फोटो- इंडियन एक्सप्रेस)

नवजोत सिंह सिद्धू के सलाहकार मलविंदर सिंह माली अपने बयानों को लेकर विवादों में हैं। मलविंदर सिंह एनएसए और टाडा के भी आरोपी रह चुके हैं। 63 साल के मलविंदर सिंह को राज्य के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने बयान देने से बचने की सलाह दी है। रविवार को नवजोत सिंह सिद्धू के साथ भी उनकी लंबी बैठक हुई थी।

सामाजिक अध्ययन के शिक्षक और जनसंपर्क अधिकारी के रूप में भी मलविंदर ने सेवा दी थी। माली ने कॉलेज में एक छात्र नेता के रूप में अपनी राजनीतिक यात्रा की शुरुआत की थी और 1980 के दशक में पंजाब छात्र संघ के राज्य महासचिव बने थे। 1993 में, माली को पंजाब पुलिस ने राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA), आतंकवादी और विघटनकारी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (TADA) के तहत उनके “भड़काऊ” लेखन के लिए गिरफ्तार किया था। डेढ़ महीने बाद हाईकोर्ट के आदेश पर उन्हें जमानत मिली थी।

अमरिंदर सिंह और प्रकाश सिंह बादल के मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने जनसंपर्क अधिकारी के रूप में भी काम किया है। विवादों से उनका पुराना रिश्ता रहा है। पूर्व जनसंपर्क मंत्री सेवा सिंह सेखवां के साथ विवाद के बाद वो चर्चा में आए थे। 2007-2012 में शिअद-भाजपा सरकार के दौरान शिक्षा मंत्री सिकंदर सिंह मलूका के साथ भी उनका विवाद हुआ था।

संगरूर जिले के भवानीगढ़ के पास सकरौदी गांव के रहने वाले माली ने पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला से पत्रकारिता की पढ़ाई की और कई पंजाबी अखबारों में काम किया। उन्होंने मोगा और बठिंडा में भी अध्ययन किया, और पंजाब में आतंकवाद के दिनों में उग्रवाद के प्रति सहानुभूति रखने वाले के रूप में भी उन्हें जाना जाता है।

सिद्धू के साथ माली के मजबूत रिश्ते इस साल फरवरी में चंडीगढ़ में सिद्धू के सहयोगी और विधायक परगट सिंह के बेटे की शादी के बाद शुरू हुए। इस बैठक में जो हुआ उससे जुड़े एक सूत्र ने कहा, ‘कैबिनेट से इस्तीफा देने के बाद सिद्धू के पास सोशल मीडिया पर बिताने के लिए पर्याप्त समय था। उन्होंने माली को देखा, जो सक्रिय रूप से किसान आंदोलन का समर्थन कर रहे थे और पंजाब सरकार की आलोचना कर रहे थे। उन्होंने करतारपुर कॉरिडोर, बालू माफिया, भू-माफिया समेत अन्य मुद्दों पर भी सिद्धू का पुरजोर समर्थन किया। सिद्धू माली से इतने प्रभावित हुए कि जब वे शादी में उनसे मिले, तो उन्होंने माली के पैर छुए और अपनी पत्नी डॉ नवजोत कौर सिद्धू को भी ऐसा करने के लिए कहा, और कहा कि माली पंजाब को बचाने के लिए बहुत अच्छा काम कर रहे हैं।

हाल के विवादों के बाद रविवार को सिद्धू ने माली और गर्ग दोनों के साथ अपने पटियाला स्थित आवास पर छह घंटे तक बैठक की। बाद में, माली ने फेसबुक पर लिखा कि बैठक “पंजाब के मुद्दों, सांप्रदायिक सद्भाव, किसानों के आंदोलन, धन की कमी और पंजाब में मोदी के एजेंडे को लागू करने की कोशिश कर रही ताकतों से लड़ने के बारे में 99.99 प्रतिशत थी।”साथ ही माली ने बाद में दावा किया कि उनकी बातों को मीडिया ने गलत ढ़ंग से लोगों तक पहुंचाया, उन्होंने कहा “मेरे विचार मेरे सोशल मीडिया पर व्यक्त किए जाते हैं। मैं इसके लिए जिम्मेदार हूं। टीवी चैनल मुझे कैसे उद्धृत करते हैं, मैं इसके लिए जिम्मेदार नहीं हूं।”