PANAMA के बाद PANDORA PAPERS: देश में डिफ़ॉल्टर कारोबारियों, नामी हस्तियों की विदेश में छिपी दौलत की खुली पोल

अपनी संपत्ति की जांच से बचने के लिए एलीट वर्ग ने नए तरीकों की खोज की। इसमें दुनियाभर की बड़ी हस्तियां शामिल हैं।

PANDORA PAPERS देश और विदेश के एलीट वर्ग से संबंधित लोगों ने अरबों की संपत्ति बनाई और इसके बारे में सरकार को कोई जानकारी नहीं दी।

ऋतु सरीन, श्यामलाल यादव, संदीप सिंह, खुशबू नारायण, जय मजूमदार

पनामा के बाद अब पैंडोरा पेपर्स से जो खबर सामने आई है, उससे देशभर में हंगामा मच गया है। इसमें पता लगा है कि देश और विदेश के एलीट वर्ग से संबंधित लोगों ने अरबों की संपत्ति बनाई और इसके बारे में सरकार को कोई जानकारी नहीं दी। कई बिजनेसमैनों ने खुद को दिवालिया तक बता डाला, जबकि उनके पास विदेश में अरबों की दौलत थी।

अपनी संपत्ति की जांच से बचने के लिए इस एलीट वर्ग ने नए तरीकों की खोज की। इसमें दुनियाभर की बड़ी हस्तियां शामिल हैं। भारत से जो चौंकाने वाले नाम सामने आए हैं, उनमें मशहूर कारोबारी अनिल अंबानी और क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर का नाम है। इंटरनेशनल कंसोर्टियम आफ इंवेस्टीगेटिव जर्नलिस्ट्स (आइसीआइजे) ने रविवार को जारी अपनी रिपोर्ट में दावा किया कि तेंदुलकर की विदेश में संपत्तियां हैं।

द इंडियन एक्सप्रेस द्वारा जांचे गए पेंडोरा पेपर्स में ये बात सामने आई है कि ऐसे कई केस हैं, जिसमें लोन डिफॉल्टर्स ने खुद को दिवालिया घोषित किया है। इनमें से कई को गिरफ्तार भी किया गया लेकिन इन लोगों के पास विदेश में अरबों की संपत्ति है।

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अनिल अंबानी ने फरवरी 2020 में लंदन की एक अदालत को बताया था कि उनकी कुल आय शून्य है। जबकि इंडियन एक्सप्रेस द्वारा पंडोरा पेपर्स की जांच में यह खुलासा हुआ है कि रिलायंस एडीए ग्रुप के चेयरमैन और उनके प्रतिनिधियों के पास जर्सी, ब्रिटिश वर्जिन आईलैंड्स और साइप्रस जैसी जगहों पर कम से कम 18 विदेशी कंपनियां हैं।

इसके अलावा जांच में ये भी पता लगा कि भगोड़े बिजनेसमैन नीरव मोदी की बहन ने भारत से भागने से ठीक एक महीने पहले एक ट्रस्ट बनाया था।

पैंडोरा पेपर्स से पता चलता है कि भारतीय बैंकों के हजारों करोड़ रुपए के कर्ज में डूबे लोगों ने अपनी संपत्ति के एक बड़े हिस्से को ऑफशोर कंपनियों के चक्रव्यूह में बदल दिया। एक मामले में सामने आया है कि एक शख्स जो आर्थिक अपराध की वजह से जेल में है, ने इसी ऑफशोर कंपनी के माध्यम से बॉम्बार्डियर चैलेंजर विमान खरीदा।

इसके अलावा कई लोगों ने अपनी संपत्ति को ऑफशोर ट्रस्टों में निवेश कर दिया। ये सब उन्होंने लोन्स भरने से बचने के लिए किया।

पैंडोरा पेपर्स में जॉर्डन के राजा, यूक्रेन, केन्या और इक्वाडोर के राष्ट्रपतियों, चेक गणराज्य के प्रधानमंत्री और पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर की डीलिंग्स का भी जिक्र है।

क्या है पैंडोरा पेपर्स?
लगभग 12 मिलियन लीक दस्तावेजों की जांच पर आधारित पैंडोरा पेपर्स यह खुलासा करता है कि कैसे दुनिया के कई अमीर और शक्तिशाली लोग अपनी संपत्ति छिपा रहे हैं। इस सूची में 380 भारतीयों के नाम भी हैं। इंडियन एक्सप्रेस ने इस सूची में से 60 प्रमुख कंपनियों और लोगों के नाम की पुष्टि की है। 117 देशों में 600 से अधिक पत्रकारों ने पैंडोरा पेपर्स के दस्तावेजों की महीनों तक जांच की है। पेंडोरा पेपर्स खुलासे में इंटरनेशनल कंसोर्टियम ऑफ इंवेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स (ICIJ) ने 14 सोर्स से दस्तावेज प्राप्त किए हैं।

पनामा पेपर्स नाम से हुए खुलासे के बाद अब पैंडोरा पेपर्स (Pandora Papers) दूसरा बड़ा खुलासा है। इसमें पता चला है कि दुनिया के कई अमीर और शक्तिशाली लोग सरकारों की नजर से अपनी संपत्ति को छुपाने और टैक्स से बचने के लिए मनी लॉन्ड्रिंग का सहारा ले रहें हैं।