PANDORA PAPERS में पूर्व मिलिट्री इंटेलीजेंस प्रमुख लूंबा का भी नाम, शेसल्स में बेटे के साथ कंपनी में दस लाख डॉलर लगाने का आरोप

दिसंबर 2016 में, रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल राकेश कुमार लूंबा ने बेटे राहुल लूंबा के साथ सेशेल्स में रैरिंट पार्टनर्स लिमिटेड को रजिस्टर किया था।

PANDORA PAPERS पैंडोरा पेपर्स मामले में इंडियन एक्सप्रेस ने एक और बड़ा खुलासा किया है। इस मामले में पूर्व मिलिट्री इंटेलीजेंस प्रमुख राकेश कुमार लूंबा का भी नाम शामिल है।

पैंडोरा पेपर्स मामले में इंडियन एक्सप्रेस ने एक और बड़ा खुलासा किया है। इस मामले में पूर्व मिलिट्री इंटेलीजेंस प्रमुख लूंबा का भी नाम शामिल है। उन पर आरोप है कि उन्होंने शेसल्स में बेटे के साथ कंपनी में दस लाख डॉलर लगाए।

दिसंबर 2016 में, रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल राकेश कुमार लूंबा ने बेटे राहुल लूंबा के साथ सेशेल्स में रैरिंट पार्टनर्स लिमिटेड को रजिस्टर किया था।

जब लूंबा साल 2010 में रिटायर हुए थे, तब उनके पास सैन्य खुफिया महानिदेशक (DGMI) जैसा सेंसटिव पद था। इससे पहले वे 3 कोर के जनरल ऑफिसर कमांडिंग थे।

इंडियन एक्सप्रेस की पड़ताल में ये पता लगा कि लूंबा की कंपनी का मॉरीशस एबीसी बैंकिंग कॉर्पोरेशन के साथ एक लिंक्ड बैंक खाता था। जिसमें पिता और उनके पुत्र रैरिंट पार्टनर्स लिमिटेड के डायरेक्टर निकले और उनका सालाना टर्नओवर करीब एक मिलियन डॉलर का है।

दिसंबर 2016 में खाते में शुरुआती जमा एक लाख डॉलर था और सेशेल्स कंपनी का अपेक्षित सालाना खर्च का अनुमान 5 लाख डॉलर था।

रैरिंट पार्टनर्स लिमिटेड में पिता और पुत्र की इस जोड़ी के अलावा एक तीसरे डायरेक्टर का नाम भी सामने आया। उनका नाम अनंत ज्ञानश्याम है और वह दिल्ली के वसंत विहार के रहने वाले हैं।

इन तीनों को कंपनी के पहले निदेशक और बेनेफिशयरी ऑनर्स (बीओ) के रूप में नामित किया गया है।
इस कंपनी में ज्ञानश्याम की हिस्सेदारी 34 फीसदी है, वहीं लेफ्टिनेंट जनरल राकेश कुमार लूंबा और राहुल लूंबा की हिस्सेदारी 33 फीसदी है। तीनों ने कंपनी खोलने और मॉरीशस बैंक-खाता खोलने के फॉर्म पर हस्ताक्षर किए हैं।

लूंबा ने इसमें अपना पता गुरुग्राम के एक महंगे अपार्टमेंट कॉम्प्लेक्स में दिखाया है। मेमोरेंडम ऑफ एसोसिएशन ऑफ रैरिंट पार्टनर्स के अनुसार, कंपनी की अधिकृत पूंजी एक लाख डॉलर थी, जिसमें प्रत्येक में 10 सेंट ($0.10) के 1,000,000 शेयर शामिल थे।

रिकॉर्ड के मुताबिक, 1 दिसंबर, 2016 को कंपनी बनाते समय तीनों निदेशकों द्वारा एक प्रस्ताव पारित किया गया था, जिसमें कहा गया था कि रैरिंट पार्टनर्स लिमिटेड के सभी रिकॉर्ड पश्चिम विहार, नई दिल्ली के एक पते पर बनाए जाएंगे।

द इंडियन एक्सप्रेस ने जब आरोपियों से संपर्क करने की कोशिश की तो राहुल लूंबा ने अपने और पिता की ओर से जवाब दिया। उन्होंने बताया कि तीसरे शेयरधारक अनंत ज्ञानश्याम उनके बिजनेस पार्टनर हैं।

उन्होंने बताया कि हमने 2016 में दक्षिण अफ्रीका में काम करने के बारे में सोचा था और नवंबर 2016 में एक कंपनी बनाने और बाद में एक बैंक खाता खोलने के लिए हम आवेदन करने के लिए आगे भी बढ़े। हालांकि, एबीसी बैंक में खाता कभी नहीं खोला गया क्योंकि हमने अपने प्लान को आगे ही नहीं बढ़ाया।

उन्होंने बताया कि कंपनी लाइसेंस फीस के लिए बाद के सालों के लिए कोई भुगतान नहीं किया गया था। इसके बाद, 2017 में हमारे सलाहकार ने हमें बताया कि कंपनी को बंद कर दिया जाएगा। इसलिए इस कंपनी में न तो कोई व्यवसाय था और न ही कोई अनुबंध। इसलिए बैंक खाता खोलने का कोई सवाल ही नहीं है।

उन्होंने कहा कि हमसे कभी हमारे रैंक या पद के बारे में नहीं पूछा गया। ये हमने भी नहीं बताया क्योंकि एक सैन्य और पुलिस के अधिकारी की रैंक निजी या व्यावसायिक यात्रा पर सुरक्षा कारणों से साझा नहीं की जाती है।

लूंबा ने कहा कि बैंक ने उन्हें पुष्टि की थी कि रैरिंट पार्टनर्स का बैंक में कोई खाता नहीं है।

इसके बावजूद रिकॉर्ड में कई चालान दिखते हैं, जिसमें रैरिंट पार्टनर्स लिमिटेड ($415) को शामिल करने और बैंक खाता खोलने के आवेदन ($345) को संसाधित करने के लिए, आबोल द्वारा पश्चिम विहार के पते पर विनीत अग्रवाल नाम के शख्स को भेजा गया।

बता दें कि रैरिंट पार्टनर्स के अलावा, राकेश कुमार लूंबा कई अन्य भारतीय कंपनियों और फाउंडेशनों के निदेशक भी हैं। कंपनी रजिस्ट्रार (आरओसी) के रिकॉर्ड के मुताबिक, वो बीबीवी इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड, रक्षा कल्याण आवास संघ, प्रवास इंडियन फाउंडेशन, सैनिक इंफ्रास्ट्रक्चर इंडिया लिमिटेड, इंडो श्रीलंका चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री, समाज पीड़ित सेवा चैरिटेबल फाउंडेशन और जन कल्याण संवाद फाउंडेशन का हिस्सा हैं।