PM Kisan: कुछ भी हो जाए, पर इन लोगों को नहीं मिलेगा मोदी सरकार की इस योजना का लाभ, जानें

इस बीच, एक स्टडी के जरिए सामने आया कि दक्षिण भारतीय सूबे आंध्र प्रदेश में कई लाभार्थी पीएम किसान योजना से बाहर रह गए।

Farmers, PM Kisan, Utility News पंजाब के लुधियाना शहर में अपने खेत में काम करता एक किसान। (एक्सप्रेस आर्काइव फोटोः गुरमीत सिंह)

प्रधानमंत्री किसान (PM Kisan) योजना के तहत अन्नदाताओं के एक बड़े वर्ग को इसका लाभ मिलता है। पर कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो चाहे कुछ भी कर लें मगर वे इस योजना से बाहर ही रहेंगे। मतलब वे इसका फायदा पाने के पात्र नहीं बन पाएंगे। आइए जानते हैं, वे कौन से लोग हैं, जो केंद्र सरकार से इसके तहत आर्थिक सहायता नहीं हासिल कर पाएंगे:

1 – सभी संस्थागत भूमि धारक।

2 – किसान परिवार जो निम्नलिखित श्रेणियों में से एक या अधिक से संबंधित हैं:

  • संवैधानिक पदों के पूर्व और वर्तमान धारक
  • पूर्व और वर्तमान मंत्री / राज्य मंत्री और लोकसभा / राज्य सभा / राज्य विधानसभाओं / राज्य विधान परिषदों के पूर्व / वर्तमान सदस्य, नगर निगमों के पूर्व और वर्तमान महापौर, जिला पंचायतों के पूर्व और वर्तमान अध्यक्ष।
  • केंद्र/राज्य सरकार के मंत्रालयों/कार्यालयों/विभागों और इसकी क्षेत्रीय इकाइयों केंद्रीय या राज्य सार्वजनिक उपक्रमों और सरकार के अधीन संबद्ध कार्यालयों/स्वायत्त संस्थानों के साथ-साथ स्थानीय निकायों के नियमित कर्मचारियों के सभी सेवारत या सेवानिवृत्त अधिकारी और कर्मचारी
    (मल्टी टास्किंग स्टाफ/चतुर्थ श्रेणी/ग्रुप डी कर्मचारियों को छोड़कर)
  • सभी सेवानिवृत्त/सेवानिवृत्त पेंशनभोगी जिनकी मासिक पेंशन 10,000/- रुपये या अधिक है। उपरोक्त श्रेणी के (मल्टी टास्किंग स्टाफ / चतुर्थ श्रेणी / समूह डी कर्मचारियों को छोड़कर)
  • पिछले निर्धारण वर्ष में आयकर का भुगतान करने वाले सभी व्यक्ति
  • डॉक्टर, इंजीनियर, वकील, चार्टर्ड एकाउंटेंट और आर्किटेक्ट जैसे पेशेवर पेशेवर निकायों के साथ पंजीकृत हैं और प्रथाओं को अपनाकर पेशा करते हैं।

इस बीच, एक स्टडी के जरिए सामने आया कि दक्षिण भारतीय सूबे आंध्र प्रदेश में कई लाभार्थी पीएम किसान योजना से बाहर रह गए। अंग्रेजी अखबार ‘द हिंदू’ की रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य में पीएम किसान सम्मान निधि योजना के लगभग 29% किसान लाभार्थियों को उनका पूरा लाभ नहीं मिला है, जो कि ₹1,168 करोड़ का है।

आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के लिए लिबरेशन टेक्नोलॉजी इंडिया (लिबटेक इंडिया) के निदेशक चक्रधर बुद्ध ने अखबार को बताया, “हमारे क्षेत्रीय कार्य और डेटा विश्लेषण से पता चलता है कि बैंक अस्वीकृति मामलों की एक अच्छी संख्या और ‘राज्य कार्रवाई आवश्यक’ मामले मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्र में अधिकारियों के बीच सूचना के प्रसार की कमी और मानक संचालन प्रक्रिया की अनुपस्थिति के कारण तीन से 18 महीनों के लिए अनसुलझे हैं।”