Success Story : कचरा बीनने वालों के साथ काम कर कचरे से हैंडबैग बनाए, आज 100 करोड़ का टर्नओवर

टेक्सटाइल मंत्रालय ने 2003 में अनीता को एक मेले में छोटा सा बूथ दिया था, जिसमें 30 लाख रुपए का पहला आर्डर मिला. (फोटो क्रेडिट : केनिफोलिस)

टेक्सटाइल मंत्रालय ने 2003 में अनीता को एक मेले में छोटा सा बूथ दिया था, जिसमें 30 लाख रुपए का पहला आर्डर मिला. (फोटो क्रेडिट : केनिफोलिस)

अनिता आहूजा कूड़ा उठाने वालों से प्लास्टिक कचरा को एकत्रित कर उससे विश्व-स्तरीय हैंडबैग बनाती हैं.

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नई दिल्ली. बिजनेस करने के लिए सिर्फ पूंजी की ही जरूरत नहीं होती है बल्कि एक अच्छा आइडिया का होना भी जरूरी है. इसी एक आइडिया की बदौलत एक महिला उद्यमी ने 100 करोड़ रुपए का टर्नओवर खड़ा कर दिया. दिलचस्प बात यह है कि इससे हजारों कचरा बीनने वालों को रोजगार मिला और केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं ‘स्वच्छ भारत मिशन’ और ‘मेक इन इंडिया’ को भी बल मिला.
दिल्ली की अनिता आहूजा और उनके पति शलभ इस अनोखे अभियान को अंजाम दे रहे हैं. केनफोलिओज के प्रकाशित खबर के मुताबिक वे प्लास्टिक के कचरे का पुनः उपयोग कर एक्सपोर्ट क्वालिटी के सुन्दर उत्पाद बनाते हैं. भोपाल में पैदा हुई और दिल्ली में पली बढ़ी इस स्वतंत्रता सेनानी की बेटी अनिता आहूजा ने अपना सारा जीवन समाज की सेवा में लगा दिया. आईए जानते हैं उन्होंने कैसे कचरे से सुंदर वस्तुएं बनाने का कारोबार खड़ा किया…
यह भी पढ़ें : कचरा बीनने वालों की दुर्दशा देखकर उन्होंने तय किया कि वे उनके जीवन को सुधारने के लिए कुछ करेंगी. लिहाजा, एक सामाजिक उद्यम की शुरुआत की जिसके तहत कूड़ा उठाने वालों से प्लास्टिक कचरा को एकत्रित कर उससे विश्व-स्तरीय हैंडबैग बनाना तय किया. बिजनेस में उतरने का उनका कोई प्लान नहीं था और न ही समाज-सेवा करने का. जिंदगी में कुछ नया करने के उद्देश्य से उन्होंने कचरा बीनने वालों के लिए काम करना शुरू किया.
यह भी पढ़ें :  एक दिन अनिता ने कुछ अपने जैसे दोस्तों और परिवार वालों के साथ मिलकर अपने इलाके में कुछ छोटे-छोटे प्रोजेक्ट लेने का निर्णय लिया. उन्होंने एक एनजीओ ‘कंजर्व इंडिया’ की शुरुआत की और इस प्रोजेक्ट के तहत सारे इलाके से कचरा एकत्र करना शुरू किया. एकत्रित किए कचरे से रसोई का कचरा अलग कर उसे खाद बनाने के लिए पास के पार्क में रखा जाता था. शुरुआत में ही उन्होंने यह महसूस किया कि कुछ भी अकेले हासिल नहीं होगा इसलिए अनीता ने दूसरी कॉलोनी से भी साथ मांगा. उनकी यह शुरुआत पैसा बनाने के लिए नहीं थी.
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