TMKOC: तारक मेहता फेम भव्या गांधी की मां ने दर्द किया बयां, पति के निधन के बाद बताया- ट्रीटमेंट का वो एक महीना कैसे गुजरा

Taarak Mehta फेम एक्टर भव्या गांधी की मां ने बताया- ठीक एक महीना पहले उनकी तबीयत बिगड़नी शुरू हुई थी। उन्होंने उस वक्त बताया था कि उनका सेम कमरे में मन नहीं लगता। उस वक्त तक उन्हें कोई भी लक्ष्ण नहीं थे।..

तारक मेहता में लंबे समय तक ‘टप्पू’ की भूमिका निभाने वाले एक्टर भव्या गांधी के पिता का मंगलवार को कोरोना की वजह से निधन हो गया था। ऐसे में अब भव्या की मां ने सामने आकर अपना दुख बयां किया है। कोरोना के दौरान ‘टप्पू’ के पापा और यशोदा गांधी के पति विनोद गांधी का ट्रीटमेंट कैसा रहा उसको लेकर उन्होंने अपनी आपबीती बताई। उन्होंने बताया कि सही ट्रीटमेंट के लिए उन्हें काफी मशक्कतों से गुजरना पड़ा। भव्या की मां ने बताया कि कोरोना की पहली वेव में भी उनका पूरी ख्याल रखा गया था।

स्पॉटबॉय के मुताबिक- भव्या गांधी की मां यशोदा ने बताया, ‘मेरे पति ने तब से सावधानियां बरतनी शुरू कर दी थीं जब से कोरोना ने भारत में दस्तक दी थी। उन्होंने न सिर्फ सोशल डिस्टेंस मेंटेन करके रखा था बल्कि उनका मास्क हमेशा ऊपर रहता था। वह हर वक्त अपने हाथ सैनिटाइज करते रहते थे, जहां भी हाथ रखते थे याद रखते थे और भूल से भी अपने फेस पर नहीं लगाते थे। अच्छे से हाथ धोते थे। फिर भी वायरस उन तक पहुंच गया। ‘

उन्होंने आगे बताया- ठीक एक महीना पहले उनकी तबीयत बिगड़नी शुरू हुई थी। उन्होंने उस वक्त बताया था कि उनका सेम कमरे में मन नहीं लगता। उस वक्त तक उन्हें कोई भी लक्ष्ण नहीं थे। यशोदा ने आगे बताया- अगली सुबह जब मैं उन्हें उनके कमरे में चेक करने गई तो उन्हें हल्का सा बुखार था। तब मैंने उन्हें तुरंत दवा दी। उस आधे दिन में उन्होंने कहना शुरू कर दिया कि उन्हें छाती में बहुत दर्द हो रहा है। तो उन्हे तुरंत मैं चेस्ट स्कैनिंग के लिए ले गई। जिसमें 5% इंफेक्शन दिखाई दिया। ऐसे में डॉक्टर्स ने मुझे कहा कि घबराने की जरूरत नहीं है, आप इन्हें आइसोलेट करके रखो। बाकी काम दवाइयां करेंगी। हमने डॉक्टर्स की सलाह पर दो दिन तक ऐसा किया। लेकिन उन्हें इससे आराम नहीं मिल रहा था। फिर हम दोबारा डॉक्टर के पास गए। इस बार हम जाने माने चेस्ट फिजीशियन के पास जा पहुंचे। लेकिन उनकी हालत वैसी ही रही।

भव्या गांधी की मां ने आगे बताया- हमने इस बीच दोबारा उनका सीटी स्कैन कराया कि आखिर देखभाल अच्छे से हो रही है दवाइयां ली जा रही हैं तो इंप्रूवमेंट क्यों नहीं हो रही? जब रिपोर्ट सामने आई तो पता चला कि इंफेक्शन डबल हो गया है। अब उन्हें अस्पताल में भर्ती करने की नौबत आ गई थी। लेकिन मुझे उस वक्त तक कोई अस्पताल मिल ही नहीं रहा था। जहां भी कॉल कर रही थी वहां कहा जा रहा था कि ‘पहले BMC में रजिस्टर करो। जब नंबर आएगा तो कॉल करेंगे।’

भव्या के मैनेजर की मदद से दादर के अस्पताल में एक बेड मिला। 2 दिन के लिए वह वहां रहे। डॉक्टरों ने वहां कहा कि उन्हें आईसीयू में भर्ती कराना होगा। उनके पास वहां ICU नहीं है। तो इन्हें किसी और अस्पताल में भर्ती कराइए। उस वक्त मैंने 500 कॉल्स किए अलग अलग अस्पतालों में कि कहीं कोई ICU बेड मिल जाए। हर तरफ से कोशिश की गई पर कहीं कोई मदद नहीं मिली। उस वक्त मैं और मेरा परिवार खुद को असहाय महसूस कर रहा था। आखिर में गोरेगांव के एक अस्पताल में ICU बेड मिला।

उन्होंने ये भी बताया कि 45 हजार रुपए के इंजेक्शन के लिए उन्होंने 1 लाख रुपए चुकाए। मुझे कहा गया था कि टॉक्सिन इंजेक्शन की जरूरत है, मुझे ये बताने में बहुत बुरा लग रहा है कि जो इंजेक्शन हमारे भारत में बनता है वो मुझे पूरे इंडिया में नहीं मिला। तब हमने उसे दुबई से मंगाया जिसकी कीमत हमें 1 लाख रुपए पड़ी। लेकिन वह इंजेक्शन भी उनके काम नहीं आ पाया।