UP Election: सपा को मात देने के लिए कैसे 2017 वाली स्क्रिप्ट पर काम कर रही बीजेपी, जानें

UP Election: यूपी चुनाव में बीजेपी इस बार भी कैरान पलायन को मुद्दा बनाने की कोशिश कर रही है।

BJP UP, kairana issue कैराना से पलायन के मुद्दे को उठाने की कोशिश में बीजेपी (फोटो- @AmitShah)

यूपी चुनाव के लिए बीजेपी अपने पिछले चुनाव यानि कि 2017 की रणनीति पर ही काम करती दिख रही है। समाजवादी पार्टी को मात देने के लिए बीजेपी ने एक बार फिर से कैराना से पलायन का मुद्दा उछाल दिया है। बीजेपी की कोशिश है कि इस मुद्दे पर ज्यादा से ज्यादा चर्चा हो। इसके साथ ही अखिलेश परिवार में टूट और सपा राज में अपराध के मुद्दों को भी बीजेपी उछालती दिख रही है।

ये वो मुद्दे हैं, जिनपर बीजेपी ने पिछली बार भी दांव लगाया था और सफल रही थी। बीजेपी के दिवंगत सांसद हुकुम सिंह ने 2016 में 346 हिन्दू समुदाय के लोगों की लिस्ट जारी कर कहा था कि एक विशेष समुदाय के आपराधिक तत्वों से डर कर इन लोगों ने कैराना से पलायन कर लिया है। उन्होंने आरोप लगाया था कि सपा सरकार के दौर में ये पलायन हुआ है। 2017 में बीजेपी ने इस मुद्दे को जमकर उछाला।

हालांकि बाद में हुकुम सिंह ने इसे कानून व्यवस्था का मुद्दा बताया था, लेकिन तबतक यह मुद्दा दो समुदायों के बीच एक तरह से नफरत फैला चुका था। बीजेपी चुनाव में इसे तब से लेकर अबतक मुद्दा बनती आई है। 2017 के विधानसभा चुनाव के समय बीजेपी के लगभग सभी बड़े नेताओं ने यहां का दौरा किया था, पलायन के मुद्दे पर सपा को घेरा था, ध्रुवीकरण की कोशिश हुई थी। इसके बाद भी यहां से बीजेपी सीट नहीं निकाल पाई थी।

हालांकि पलायन के इस मुद्दे से कैराना में भले ही बीजेपी को जीत नहीं मिल सकी हो, लेकिन बाकी सीटों पर इसका खासा असर देखने को मिला था। खासकर पश्चिमी यूपी में जहां पहले ही मुजफ्फनगर दंगों के कारण ध्रुवीकरण हो रखा था।

इस बार के चुनाव में भी बीजेपी इस मुद्दों को भूनाने की पूरी कोशिश करती दिख रही है। सबसे पहले यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ कैराना पहुंचकर पलायन के मुद्दों को हवा दे चुके हैं, उसके बाद खुद गृहमंत्री अमित शाह भी कैराना पहुंचे और पलायन का मुद्दा उठाकर अपने चुनावी अभियान की शुरूआत की।

कैराना से पलायन के साथ-साथ बीजेपी के नेता सपा राज में गुंडाराज और अखिलेश यादव के पारिवारिक कलह को भी मुद्दा बना रहे हैं। पिछली बार अखिलेश का, उनके चाचा शिवपाल यादव के साथ मतभेद था, जो इस बार सपा के साथ हैं, तो वहीं इस बार मुलायम सिंह की छोटी बहु अर्पणा यादव बगावत करके बीजेपी शामिल हो गई हैं। बीजेपी सपा के समय के कानून-व्यवस्था को भी मुद्दा बना रही है।

हालांकि इन आरोपों को लेकर सपा प्रमुख अखिलेश यादव का कहना है कि बीजेपी के पास अपने कार्यों को गिनाने के लिए कुछ नहीं है, इसलिए वो इसे मुद्दा बना रहे हैं। रविवार को एक इंटरव्यू के दौरान सपा प्रमुख ने कहा था कि बीजेपी के पास ना तो रोजगार, ना तो विकास कार्य और ना ही अपने पुराने वादों पर कहने के लिए कुछ है। उन्होंने कहा कि अगर पलायन की बात है तो सबसे ज्यादा पलायन उत्तराखंड से हुआ है, उसपर बीजेपी क्यों बात नहीं करती है।